पोर्टफोलियो को स्थिर और कम जोखिम वाला बनाता है Gold

Why should one invest in gold: गोल्ड उन निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं, साथ ही मंहगाई और बाजार की अस्थिरता से भी अपने पैसे को सुरक्षित रख सकते हैं। भारत के लोगों को सोने से खासतौर पर प्यार है। सोने की कीमत और उसकी इमोशनल वैल्यू पिछले कुछ दशकों में जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। कोई भी समझदार इन्वेस्टर यह जरुर जानता है कि गोल्ड महंगाई और मार्केट में आने वाले उतार-चढ़ाव से काफी हद तक बचाव करता है। हालांकि, सोने के दाम भी ऊपर नीचे होते रहते हैं।

अपने एसेट को डाइवर्स बनाने के लिए गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करना कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ सालों में यह उन लोगों के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध एसेट बन चुका है, जो अपने पो्टफोलियो को डाइवर्स बनाना चाहते हैं और मार्केट में आने वाले उतार-चढ़ाव के साथ इनफ्लेशन से अपने पैसों को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

gold

गोल्ड की कीमतें तय करने में कई फैक्टर काम करते हैं, इसमें भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, आर्थिक स्थिति के साथ आपूर्ति और मांग जैसे कई फैक्टर शामिल हैं। ज्यादा बेहतर और इनफॉर्म्ड इन्वेस्टमेंट डिसीजन के लिए इन्वेस्टर को इन सभी फैक्टर से अप टू डेट रहना चाहिए ताकि वह बेहतर निर्णय ले सकें। इन्वेस्टर्स सोने में कई तरह से पैसे लगा सकते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।

फिजिकल गोल्ड: यह एक फिजिकल एसेट है, जो आपके पास होता है। इसका अपना आंतरिक मूल्य होता है। इसे आर्थिक अनिश्चित्ता के समय एक सुरक्षित एसेट माना जाता है। इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त मुद्रा का दर्जा मिला हुआ है और इसका इस्तेमाल व्याार और एक्सचेंज के लिए हजारों सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है। सोने में निवेश करने का सबसे आम तरीका बार, सिक्के या ज्वेलरी के रूप में फिजिकल गोल्ड खरीदना है। हालांकि ये ट्रांजैक्शन कॉस्ट, शुद्धता की चिंता और स्टोरेज फीस की वजह से ये थोड़े महंगे होते हैं। इनके चोरी होने या खोने की आशंका भी होती है, इनको सुरक्षित रखने के लिए इंश्योरेंस भी यूज किया जा सकता है।

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गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड: सोने में निवेश करने का एक बेहतरीन विकल्प है। गोल्ड ईटीएफ स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड रहता है, इसमें आप बिना शुद्धता या फिर चोरी होने की चिंता के डायरेक्ट सोने में अपने पैसे निवेश कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ प्रास को ट्रैक करने के साथ परफॉर्मेंस को भी लगातार दिखाते रहते हैं। दूसरी तरफ ये सहायक लागत, प्रबंधन शुल्क, पोटेंशियल एग्जिट लोड और ट्रैकिंग एरर के साथ आते हैं। ट्रैकिंग एरर ईटीएफ रिटर्न और ऐसेट यानी गोल्ड रिटर्न के बीच का अंतर होता है।

सॉवरेन गोल्ड बांड: इस गोल्ड बांड को सरकार के द्वारा शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सोने की फिजिकल मांग को कम करना था। यह सकीम 2015 में चालू की गई थी। इसके तहत आप बाजार से काफी ज्यादा कम कीमत पर गोल्ड खरीद सकते हैं, साथ ही इसमें किए गए इन्वेस्टमेंट पर सुरक्षा की गारंटी सरकार की होती है। ये वित्त मंत्रालय की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए जाते हैं। ये गोल्ड बांड आपको कर लाभ प्रदान करते हैं। इन बांड की इंट्रेस्ट इनकम वैसे तो निवेशक के टैक्स ब्रैकेट में आती है, लेकिन अगर ये मैच्योरिटी तक रखते जाते हैं, तो कैपिटल गेन पर टैक्स से छूट दी जाती है।

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