नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने अपने सभी 28,000 पेट्रोल पंपों के साथ देश भर में दुनिया के सबसे साफ पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति शुरू कर दी है। इस ईंधन में बहुत कम सल्फर होता है। इस ईंधन की शुरुआत करने की डेडलाइन 1 अप्रैल थी, मगर आईओसी ने उससे ही इसकी आपूर्ति शुरू कर दी। आईओसी के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा है कि हमने देश भर में बीएस-VI ग्रेड के ईंधन की आपूर्ति सफलतापूर्वक शुरू की है। भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) सहित बाकी ईंधन खुदरा रिटेलर भी बीएस-VI ग्रेड के ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं और पूरे देश में इस सप्ताह के भीतर सबसे स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि बीएस6 ईंधन को तैयार करने के लिए देश की रिफायनियरों ने करीब 80000 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस निवेश के चलते आगामी 1 अप्रैल से पेट्रोल और डीजल महंगा हो सकता है।

बीएस-VI ईंधन से प्रदूषण होगा कम
सरकार ने यूरो-VI उत्सर्जन पर आधारित ईंधन की आपूर्ति शुरू करने की समय सीमा 1 अप्रैल निर्धारित की थी। इसके साथ ही भारत वाहन के उत्सर्जन में कटौती करने की कोशिश करने वाले उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जो पेट्रोल और डीजल में प्रति मिलियन 10 पार्ट सल्फर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो प्रमुख शहरों में प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक है। आईओसी ने शुरुआत ऐसे समय पर की है जब कोरोनोवायरस के प्रकोप से जूझ रहे भारत में प्रतिबंध और लॉकडाउन की स्थिति है।
2010 में शुरू किया था यूरो-3
भारत ने 2010 में 350 पीपीएम की सल्फर सामग्री के साथ यूरो-3 (जो भारत स्टेज-3 के समतुल्य है) ईंधन को अपनाया और फिर बीएस-IV में जाने के लिए देश को सात साल लग गए, जिसमें 50 पीपीएम की सल्फर सामग्री थी। देश को बीएस-IV से बीएस-VI तक का सफर तय करने में सिर्फ तीन साल लगे हैं। इस बीच में भारत ने बीएस-V छोड़ने का फैसला लिया। वरना तेल रिफाइनरियों, साथ ही ऑटोमोबाइल निर्माताओं को दो बार निवेश करना पड़ता। पहले बीएस-V ग्रेड ईंधन के लिए फिर बीएस- VI के लिए।
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