हैदराबाद। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव का मानना है कि लॉकडाउन लंबा खिंचने से लाखों भारतीय हाशिये पर पहुंच जाएंगे। हालांकि उनका यह भी मानना है कि कोरोना वायरस महामारी समाप्त होने के बाद अर्थव्यवस्था में तेज वापसी करेगी और दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेज रह सकती है।

पहले ही आ रही थी विकास दर में गिरावट
वह मंथन फाउंडेशन की तरफ से आयोजित एक वेबिनार में कोरोना वायरस के बाद की स्थिति पर आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे। इसमें आरबीआई की पूर्व डिप्टी गवर्नर उषा थोरट ने भी हिस्सा लिया। सुब्बाराव ने इस मौके पर कहा, "चूंकि अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था में वास्तव में गिरावट आ जाएगी या फिर वृद्धि में काफी गिरावट आएगी। हमें याद रखना चाहिए कि इस संकट के दो महीने पहले भी हमारी वृद्धि दर कम हो रही थी। अब यह वृद्धि दर पूरी तरह से ठहर गई है।'
लाखों लोगों का अस्तित्व खतरे में
डी सुब्बाराव ने कहा कि पिछले साल वृद्धि दर 5 फीसदी रहने का अनुमान है। 'जरा सोचिए, पिछले साल 5 फीसदी की वृद्धि और इस साल सीधे गिरावट या शून्य वृद्धि की ओर हम जा रहे हैं, इस हिसाब से सीधे 5 फीसदी की गिरावट है।' उन्होंने कहा कि यह सच है कि भारत इस संकट में अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने जा रहा है, लेकिन यह संतोष की बात नहीं है, क्योंकि हम बहुत गरीब देश हैं। यदि संकट बना रहता है और जल्द ही लॉकडाउन नहीं हटाया जाता है, तो यह बहुत संभव है कि लाखों लोग हाशिये पर पहुंच जायेंगे और उनके सामने अस्तित्व को बचाये रखने का संकट खड़ा हो जायेगा।
लॉकडाउन हटते ही आर्थिक गतिविधि बहुत तेज होगी
पूर्व आरबीआई गवर्नर ने वर्तमान परिस्थितियों पर विचारों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि विश्लेषकों की भविष्यवाणी के अनुसार, भारत में तेजी से वापसी होगी, जो अधिकांश अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। उन्होंने कहा, ' और हम वी-आकार की वापसी की उम्मीद क्यों करते हैं? क्योंकि एक चक्रवात या भूकंप की तरह यह एक प्राकृतिक आपदा नहीं है। इसमें पूंजी बर्बाद नहीं हुई है। कारखाने अपनी जगह पर ही हैं। हमारी दुकानें भी अभी खड़ी हैं। लॉकडाउन हटते ही हमारे लोग काम करने को तैयार हैं। इसलिए यह काफी संभव है कि वी-आकार की वापसी होगी और ऐसे में मुझे लगता है कि भारत के पास ज्यादातर देशों की तुलना में बेहतर मौका है।'
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