नयी दिल्ली। कच्चे तेल के आयात के मामले में भारत के लिए एक खुशखबरी आयी है। भारत को अब अमेरिका के अलावा रूस से भी कच्चा तेल मिलेगा। रूस ने भारत को कच्चे तेल के आयात कि फैसला किया है। अभी तक रूस भारत को रक्षा उपकरण देता रहा है। इस लिस्ट में अब कच्चा तेल भी जुड़ जायेगा। रूस से कच्चे तेल के आयात के लिए भारत की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने रूस की रोस्नेफ्ट ऑयल के साथ हर साल 20 लाख टन कच्चे तेल के आयात के लिए समझौता किया है। इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत-रूस प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान किए गए। भारतीय पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया और रोसनेफ्ट के सीईओ इगोर सेचिन ने रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। प्रधान ने इसे एक महत्वपूर्ण समझौता बताते हुए कहा है कि कच्चे तेल की सोर्सिंग में विविधता लाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के हमारे प्रयासों में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है।
ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा
दोनों पक्षों ने भारतीय तेल और गैस सार्वजनिक उपक्रमों और रोसनेफ्ट के बीच चल रहे निवेश की समीक्षा की। साथ ही ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने और प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के स्रोत के अलावा निवेश के मोर्चे पर हाइड्रोकार्बन कारोबार को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई। प्रधान ने कहा कि हाइड्रोकार्बन भारत और रूस के बीच रणनीतिक और विशेषाधिकार साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
भारत ने बदली है रणनीति
भारत ने पिछले कुछ सालों में कच्चे तेल के आयात को लेकर अपनी रणनीति बदली है। भारत कच्चे तेल के आयात के लिए अब सिर्फ मध्य-पूर्व देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसलिए भारत अमेरिका के बाद अब रूस से तेल आयात करेगा। देश की कुल जरूरत का 84 फीसदी तेल आयात किया जाता है। तेल के आयात के लिए भारत काफी लंबे समय से मध्य पूर्व के देशों पर ही निर्भर रहा है। हालांकि इस क्षेत्र से भारत ने तेल आयात 2018 में 65 फीसदी से घटा कर 2019 में 60 फीसदी कर दिया, जो 2015 के बाद सबसे कम है।
कितना तेल आया मध्य पूर्व से
2019 में भारत ने मध्य पूर्व से रोजाना 26.8 लाख बैरल तेल मंगाया, जो 2018 के मुकाबले 10 फीसदी कम है। वहीं 2019 में बाकी जगहों से भारत ने रोज 18 लाख बैरल तेल का आयात किया। क्षेत्र में तनाव के अलावा सऊदी अरब सहित ओपेक देशों द्वारा तेल उत्पादन में अनुमान से ज्यादा कटौती और अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान से कम निर्यात की वजह से भी भारत इस क्षेत्र से ज्यादा तेल आयात नहीं कर सका।
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