नयी दिल्ली। पहली बार भारत वैश्विक हथियार निर्यातकों की सूची में शामिल हुआ है। भारत ने हथियारों के निर्यातक के मामले में 23वें नंबर पर शुरुआत की है, मगर विदेशों में हथियारों की बिक्री को बढ़ावा देने के सरकार के कदम से हथियारों के निर्यात के मामले में आने वाले सालों में भारत की रैंकिंग में तेजी से सुधार होने की संभावना है। एसआईपीआरआई द्वारा वैश्विक हथियारों के ट्रांसफर के लेटेस्ट आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 से भारत द्वारा हथियारों के आयात में 32 फीसदी की भारी गिरावट आई है, जो यह दर्शाता है कि भारत का मेक इन इंडिया कार्यक्रम काफी अच्छे से आगे बढ़ रहा है। हालांकि आंकड़े यह भी बताते हैं कि सऊदी अरब के बाद भारत अभी भी हथियारों का दूसरा सबसे आयातक बना हुआ है।
तेजी से घटा अमेरिका से हथियारों का आयात
दिलचस्प बात यह है कि भारत द्वारा अमेरिका से हथियारों के आयात में पिछले 5 सालों में भारी गिरावट आयी है। आंकड़ों के मुताबिक अब रूस भारत को 56 फीसदी हथियारों का निर्यात करता है। बल्कि अब अमेरिका भारत को हथियारों की आपूर्ति करने वाले टॉप 3 देशों में भी नहीं है। रूस के बाद 14 फीसदी के साथ इजराइल और 12 फीसदी के साथ फ्रांस भारत को सबसे अधिक हथियार भेज रहे हैं। अमेरिका 2010-14 के दौरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया था, क्योंकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंध एक रणनीतिक साझेदारी में डेवलप हुए थे।
अमेरिका से ज्यादा बड़े ऑर्डर रूस को
भले ही भारत ने अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर और अतिरिक्त पी8आई समुद्री विमान जैसे सिस्टम का ऑर्डर अमेरिका को दिया है। फिर भी एस 400 एंटी-एयर सिस्टम से लेकर अतिरिक्त टी90 टैंक और हेलीकॉप्टरों तक का रूस को दिया गया ऑर्डर ज्यादा बड़ा है। हालांकि इसमें अमेरिका के साथ हाल ही में हुए अपाचे और एमएच 60 'रोमियो' हेलिकॉप्टरों के लिए 3 अरब डॉलर के सौदे को शामिल नहीं किया गया है। 2015-19 के दौरान भारत ने रणनीति के तहत हथियारों के आपूर्तिकर्ता में बदलाव की नीति को बरकरार रखा और इस दौरान अमेरिका से हथियारों का आयात 2010-14 की तुलना में 51 घट गया।
कौन हैं भारत के सबसे बड़े खरीदार
भारत के सबसे बड़े हथियार ग्राहक म्यांमार (46 फीसदी), श्रीलंका (25 फीसदी) और मॉरीशस (14 फीसदी) हैं। भारत की पूरी दुनिया के हथियार निर्यात में इस समय हिस्सेदारी सिर्फ 0.2 फीसदी है। मगर भारत का लक्ष्य पांच साल के भीतर अपने डिफेंस निर्यात को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने का है। वहीं एसआईपीआरआई डेटा यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान अपने हथियार सिस्टम के लिए पूरी तरह से चीन पर निर्भर नहीं है। 2015 से पाकिस्तान अपने 73 फीसदी हथियारों का आयात चीन से करता है।
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