नई दिल्ली। काम के भारी बोझ और कर संग्रह का लक्ष्य ऊंचा होने के कारण चालू वित्त वर्ष में करीब दो दर्जन राजपत्रित आयकर अधिकारियों ने नौकरियां छोड़ी हैं। इनकम टैक्स गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन (आईटीजीओए) के उपाध्यक्ष भास्कर भट्टाचार्य ने आईएएनएस को बताया, "हमारे विभाग की स्थिति सच में खराब है। यहां काम का दबाव बहुत ज्यादा है। इस वित्त वर्ष के दौरान 22 से 23 अधिकारियों ने नौकरी छोड़ दी है।"

काम का बढ़ा बोझ
भट्टाचार्य ने कहा कि बीते कुछ सालों में काम का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। आईटीजीओए में देश भर के 9,500 से अधिक राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। आयकर विभाग ने अब तक पांच लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर का ही संग्रह किया है, जो कि साल 2020 के वित्त वर्ष के 13.35 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट लक्ष्य का आधे से भी कम है। इसी वजह से अधिकारियों पर और राजस्व के संग्रह का दबाव है।
वहीं सरकार भी कर रही जबरिया रिटायर
एक तरफ जहां इनकम टैक्स अधिकारी काम के बोझ से नौकरी छोड़ रहे हैं, वहीं मोदी सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा के कई अधिकारियों को जबरिया रिटायर भी किया है। हाल ही में इंडियन रेवन्यू सर्विस के 18 अफसरों को नौकरी से निकाला जा चुका है। जिन अफसरों को जबरिया रिटायर किया गया है, वह हैं प्रिंसिपल कमिश्नर डॉ. अनूप श्रीवास्तव, कमिश्नर अतुल दीक्षित, कमिश्नर संसार चंद, कमिश्नर हर्षा, कमिश्नर विनय व्रिज सिंह, अडिशनल कमिश्नर अशोक महिदा, अडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर अमरेश जैन, ज्वाइंट कमिश्नर नलिन कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस पाब्ना, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस बिष्ट, असिस्टेंट कमिश्नर विनोद सांगा, अडिशनल कमिश्नर राजू सेकर डिप्टी कमिश्नर अशोक कुमार असवाल और असिस्टेंट कमिश्नर मोहम्मद अल्ताफ।
क्या है नियम 56?
रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दे सकती है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवको को रिटायर करना होता है।
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