नयी दिल्ली। आईएमएफ (International Monetary Fund) ने कहा है कि कोरोनावायरस का ग्लोबल इकोनॉमी पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक आईएमएफ की रणनीति नीति और समीक्षा विभाग के प्रमुख Martin Muehleisen ने कहा है कि सरकारों के लिए मुख्य लक्ष्य इस तरह से वायरस के फैलने को सीमित करना होना चाहिए जिससे यह विश्वास बने कि इसकी वजह से लगने वाला आर्थिक झटका अस्थायी होगा। उन्होंने कहा कि बैंकों और सरकारों ने बाजारों को लिक्विडिटी प्रदान करने और उनका संचालन बरकरार रखने के लिए पहले से ही जरूरत से ज्यादा कई उपाय किए हैं। मगर उनका मानना है कि इस तरह के कदमों को प्रभावी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित किया जाना चाहिए।
इस तरह तेज़ी से बढ़ेगा आत्मविश्वास
Martin Muehleisen का मानना है कि जितने बेहतर संगठित और अधिक समन्वित हेल्थ रेस्पोंस से कोरोनावायरस से निपटा जाएगा उतनी ही जल्दी आत्मविश्वास का लौटना संभव हो पाएगा। पिछले हफ्ते सात अमीर देशों के समूह के नेताओं ने कहा था कि वे कोरोना से निपटने के लिए जो कुछ भी करना पड़ा वो करेंगे। मगर उन्होंने इस मामले में कोई डिटेल नहीं दी, जिससे बाजारों में अस्थिर बरकरार रही। अब अगले हफ्ते दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं (G20) के नेता एक शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे। मगर जानकारों का मानना है कि समूह के भीतर ही कई विभाजन होने की वजह से कार्रवाई की आशा कम ही है।
कोरोनावायरस को रोकने में इकोनॉमी को झटका
कोरोनावायरस ने दुनिया भर में 254,700 से अधिक लोगों को संक्रमित कर दिया है और 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना को फैलने से रोकने के प्रयासों से दुनिया भर में आपूर्ति और मांग दोनों को गंभीर झटके लगे, जो वित्तीय क्षेत्र से होकर गुजरे। उनके मुताबिक कमोडिटी की कीमतें, विशेष रूप से तेल की कीमतों में तेज गिरावट, घटने से कई देशों के लिए एक और चुनौती सामने आ गई, जबकि उन देशों को सहारा मिला जो कमोडिटीज का आयात करते हैं।
कोरोना जितने अधिक समय तक रहेगा उतना अधिक नुकसान
इससे पहले रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा था कि कोरोना के कारण जितने लंबे समय तक अड़चन रहेगी वैश्विक मंदी का खतरा उतना ही अधिक हो जाएगा। मूडीज के अनुसार कोरोनोवायरस के अधिक तेजी और व्यापक स्तर पर फैलने से बहुत अधिक आर्थिक गिरावट आएगी। मूडीज के अनुसार कोरोना से प्रभावित देशों में घरेलू खपत की मांग में गिरावट से आपूर्ति चेन और माल-सेवाओं का क्रॉस बॉर्डर व्यापार बाधित होगा।
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