GST Council Meeting: इस दिन होगी GST काउंसिल की मीटिंग, इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
जीएसटी काउंसिल की 54वीं बैठक अगले महीने होने वाली है। वित्त मंत्री के अनुसार, राज्यों द्वारा अनुरोध किया जाता है तो जीएसटी काउंसिल जीएसटी कम्पेंसशन सेस को जून 2025 तक बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। आइए आपको बताते हैं कि इस मीटिंग में किन अहम मुद्दों पर चर्चा होगा।

इस दिन होगी जीएसटी काउंसिल की 54वीं मीटिंग
GST कॉउंसिल ऑफ इंडिया 9 सितंबर को जीएसटी काउंसिल 54वीं मीटिंग करेगी। वित्त मंत्री के मुताबिक लग्जरी गुड्स और जीएसटी कंपेंसेशन सेस के संभावित विस्तार और अन्य मुद्दों को लेकर बात होगी।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में टैक्स दरों को तर्कसंगत(रेशनल) बनाने पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की पिछले हफ्ते बैठक हुई थी। इसमें मुख्य तौर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत स्लैब को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने पर सहमति बनी थी। निर्माला सितारमण के अनुसार, सरकार का लक्ष्य किसी भी उत्पाद पर टैक्स बढ़ाए बिना जीएसटी दरों को सरल बनाना है। उन्होंने पॉलिटिकल इश्यू को किनारे रखकर राजस्व बढ़ाने के सहयोगात्मक प्रयासों के लिए राज्यों के वित्त मंत्रियों की प्रशंसा भी की।
इन मुद्दों पर होगी चर्चा (54th GST Council Meeting)
वित्त मंत्री के अनुसार, यदि राज्यों द्वारा अनुरोध किया जाता है तो जीएसटी काउंसिल जीएसटी कम्पेंसशन सेस को जून 2025 तक बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। जीएसटी कम्पेंसशन सेस वर्तमान में लागू है और जीएसटी लागू होने के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई के लिए कुछ वस्तुओं पर लगाया जाता है। जीएसटी काउंसिल 9 सितंबर की अपनी बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस को 18 पर्सेंट टैक्स के दायरे से बाहर रखने पर भी चर्चा करेगी।
कर्नाटक ने इस मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की है
कर्नाटक सहित कई राज्यों ने यह मुद्दा उठाया है कि जो राज्यों को मुआवजे के तौर पर राशि मिलनी चाहिए थी,लेकिन केंद्र सरकार ने कोविड के दौरान उसका उपयोग किया। इसपर भी चर्चा होनी चाहिए। इस वजह से काउंसिल इस पर भी चर्चा कर सकती है कि राज्यों के बीच जीएसटी संसाधनों का बटवारा कैसे किया जाए और यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसमें बदलाव की मांग कई राज्यों ने जीएसटी के शुरुआत से ही कर रहे है।
मूलधन को चुकाने के लिए राशि का इस्तेमाल
जीएसटी के कार्यान्वयन के बाद राज्यों की राजस्व कमी को पूरा करने के लिए शुरू में 5 साल के लिए मुआवजा उपकर लाया गया था। मुआवजा उपकर जून 2022 में खत्म हो गया, लेकिन लेवी के जरिये जमा की गई राशि का इस्तेमाल कोविड-19 के दौरान केंद्र द्वारा उधार लिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के ब्याज और मूलधन को चुकाने के लिए किया जा रहा है।
जीएसटी परिषद को अब अपने नाम के संबंध में मौजूदा जीएसटी मुआवजा उपकर के भविष्य और कर्ज चुकाने के बाद राज्यों के बीच इसके वितरण के तौर-तरीकों पर फैसला करना होगा। क्षतिपूर्ति की कम राशि जारी करने के कारण राज्यों के संसाधन अंतर को पूरा करने के लिए, केंद्र ने उपकर संग्रह में कमी के एक हिस्से को पूरा करने के लिए 2020-21 में 1.1 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 में 1.59 लाख करोड़ रुपये एक के बाद एक ऋण के रूप में उधार लिए और जारी किए।
इसके अलावा GST काउंसिल की मीटिंग में इंडस्ट्री की अपील पर भी चर्चा हो सकती है। इनमें कॉर्पोरेट गारंटी और इंप्लाई स्टॉक ऑप्शंस के लिए टैक्स नियमों पर स्पष्टता के साथ-साथ ऑनलाइन गेमिंग पर GST दर की समीक्षा शामिल है।
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