Gruha Lakshmi Yojana: आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कर्नाटक सरकार के द्वारा शुरू की गई इस योजना को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। कर्नाटक सरकार द्वारा गृह लक्ष्मी योजना की शुरूआत ने आर्थिक रूप से वंचित लोगों की मदद के लिए की गई है। आपको बताते चलें कि सरकार की इस फैसले से उसके कल्याण कार्यक्रमों और राजकोषीय समझदारी पर सवाल उठाया जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कर्नाटक की सरकार के द्वारा शुरू की गई इस स्कीम के तहत जो परिवार गिरीबी रेखा के नीचे हैं, उन्हें सरकार के द्वारा हर महीने सरकार के द्वारा 2000 रुपए दिए जाते हैं।
गौरतलब है कि कर्नाटक की सरकार ये पैसे परिवार की मुखिया महीला के अकाउंट में डालती है। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कर्नाटक की सरकार के द्वारा इस योजना के तहत करीब 1.36 करोड़ परिवारों को रजिस्टर किये गए है और इस योजन का लाभ उठा रहे हैं। अगर इन आंकड़ों को कैलकुलेट करते हैं, तो इस स्कीम की वजह से कर्नाटक की सरकार पर हर साल 32000 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोड पड़ रहा है।

मेनस्ट्रीम इकोनॉमिक्स के मुताबिक महिलाओं के द्वारा घर पर किया जा रहा काम आर्थिक गतिविधि के अंतर्गत नहीं आता है। इन कामों में खाना पकाने और कपड़े धोने जैसे घरेलू काम के अलावा घर पर मौजूद बुजुर्गों और बच्चों की देखभाल भी शामिल है।
इनोनॉमी के हिसाब से बात करें तो लाभकारी आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है। हलांकि उनके बिना पैसे के किए गए काम का बोझ पुरुषों के मुकाबले काफी ज्यादा है। एनएसओ यानी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किए गए एक सर्वे में पता चलता हे कि 18.4 प्रतिशत महिलाएं और 57.3 प्रतिशत पुरुष रोजगार से जुड़ी हुई गतिविधियों में शामिल हैं। वहीं घरेलु कामों में महिलाओं की हिस्सेदारी 81.2 प्रतिशत के आस पास की है। वहीं 26.1 प्रतिशत भी इस तरह की गतिविधियों में अपना हाथ बंटाते हैं।
इसके अलावा जो महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है या गरीबी रेखा के नीचे में उनके ऊपर काम कर लगभग 2 गुना बोझ पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन महिलाओं को जलने के लिए पैसे कमाने होते हैं और उसके लिए भी काम करना पड़ता है और साथ ही साथ में घर की सारी जिम्मेदारियां को भी उठाना पड़ता है। ऐसे में पैसे कमाने के लिए और घर चलाने के लिए इन महिलाओं पर काफी ज्यादा दबाव होता है। सरकार द्वारा शुरू की गई गृह लक्ष्मी योजना ऐसी ही महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रही है।
अपको बताते चले कि जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ता जा रहा है और जनसंख्या बढ़ रही है, बुजुर्गों की देखभाल का बोझ बढ़ने की उम्मीद है। इसका ज्यादा असर खासकर गरीब परिवारों पर देखने को मिल सकता है। वहीं राज्य से मिलने वाली सहायता से इन परिवारों को लाभ मिलता है। इस संदर्भ में महीलाओं की दी जाने वाली सहयता को मुफ्त नहीं कहा जा सकता है।
इस अर्थव्यवस्था में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है। ऐसा इस लिए क्यों कि वो ज्यादा बार्गेन नहीं कर पाती हैं।
यही कारण है कि सिस्टम में, महिलाओं को अक्सर कम वेतन दिया जाता है। ऐसे में सरकार की बिना शर्त सहायता से महिलाओं को राहत मिलती है और उन्हें इस गलत सिस्टम से लड़ने के लिए भी शसक्त बनाती है। यहा योजना केंद्र सरकार की महिला सम्मान निधि की तलह ही है।
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