नयी दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की तीसरी यानी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की विकास दर (GDP Growth Rate) 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। अधिकतर स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के अनुमान मुताबिक तीसरी तिमाही में देश की विकास दर बिना किसी बदलाव के 4.5 फीसदी ही रह सकती है। हालांकि कृषि और सरकारी खर्चों में मामूली बढ़ोतरी के आधार पर अन्य लोगों को उम्मीद है कि विकास दर तेजी से आगे बढ़ेगी। बता दें कि देश की विकास 2019-20 की अप्रैल-जून में 5 फीसदी रहने के बाद जुलाई-सितंबर में 4.5 फीसदी तक गिर गयी थी, जो पिछली 26 तिमाहियों में सबसे कम है। अब अधिकतर अर्थशास्त्री मानते हैं कि जुलाई-सितंबर के मुकाबले अक्टूबर-दिसंबर में विकास दर में कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।

सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि रहेगी सपाट
एसबीआई के समूह की मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष का कहना है कि हमारा समग्र अग्रणी संकेतक (33 प्रमुख अग्रणी संकेतकों का सूचकांक) बताता है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि वित्त वर्ष 2014 की तीसरी तिमाही में 4.5 फीसदी पर सपाट रहेगी। इससे पहले सांख्यिकी कार्यालय ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 6.8 फीसदी के पिछले अनुमान के जीडीपी विकास दर घटा कर 6.1 फीसदी कर दी। साथ ही वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 5 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान लगाया, जो पिछले 11 सालों में सबसे सुस्त रफ्तार है।
2020-21 में होगा सुधार
यूनियन बजट से एक दिन पहले आये आर्थिक सर्वेक्षण 2020 में वित्त वर्ष 2020-21 में 6-6.5 फीसदी विकास रहने का अनुमान लगाया गया है। कोटक महिंद्रा बैंक की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि बहुत सुधार नहीं हुआ है। हमने अपने पूरे साल के सकल घरेलू उत्पाद के लक्ष्य को 4.7 फीसदी पर बरकरार रखा है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2019 से अब तक नीतिगत दरों में 135 आधार अंकों की कटौती की है, और सरकार ने निवेश को आकर्षित करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए कॉर्पोरेट दर कर को घटाकर 22 फीसदी कर दिया है।
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