नयी दिल्ली। केंद्र सरकार सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने में बहुत तेजी दिखा रही है। एक के बाद एक उन कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं जिनमें सरकार हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। बजट 2020 में एलआईसी और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया गया। सरकार एलआईसी की आईपीओ लाकर इसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करेगी। वहीं आईडीबीआई बैंक में स्टॉक एक्सचेंज के जरिये हिस्सेदारी बेचेगी। इसी बीच एक और सरकारी कंपनी में हिस्सेदारी बिकने की खबर आयी है। चालू वित्त वर्ष में सरकार स्टील कंपनी सेल (SAIL) में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी। सेल की 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने से सरकार को करीब 1000 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी। सेल की हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस इश्यू के जरिये बेची जायेगी।
अनोखे तरीके से बिकेगी सेल में हिस्सेदारी
लाइवमिंट में छपी रिपोर्ट के अनुसार निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) और इस्पात मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक सेल में हिस्सा बेचने के लिए सिंगापुर और हांगकांग में रोड शो की योजना बनायी जा रही है। हालांकि कोरोनोवायरस के डर के कारण हांगकांग रोड शो रद्द किया जा सकता है। सेल में सरकार की 75 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने दिसंबर 2014 में स्टील में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। मौजूदा बाजार मूल्य पर कंपनी में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार लगभग 1,000 करोड़ जुटा सकती है।
बढ़ाया गया है विनिवेश का टार्गेट
गौरतलब है कि सरकार सेल में हिस्सेदारी इसी वित्त वर्ष में बेच सकती है। क्योंकि सरकार संशोधित अनुमान में निर्धारित 65,000 करोड़ के विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करेगी। अब तक इस वित्तीय वर्ष में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम यानी सीपीएसई में हिस्सेदारी बेच कर 34,000 करोड़ रुपये जुटाये हैं। बाकी बचे 31000 करोड़ रुपये मार्च 2020 तक जुटाये जायेंगे। 2020-21 में सरकार ने सीपीएसई हिस्सेदारी बिक्री से 1.20 लाख करोड़ इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है। सरकार ओएफएस के माध्यम से गार्डन रीच शिपबिल्डर्स में 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है, जिससे सरकार को 200 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस कंपनी में सरकार की 74.50 फीसदी हिस्सेदारी है।
क्या है सरकार की योजना
सरकार की योजना वित्त वर्ष 2020-21 में पीएसयू या सरकारी कंपनियों में विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेच कर 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने की है। ये अब तक किसी भी एक वित्त वर्ष में पीएसयू कंपनियों में विनिवेश के जरिये पूँजी जुटाने का अब तक का सबसे बड़ा टार्गेट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि विनिवेश के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाएगा, जिसका अर्थव्यवस्था पर कई तरह से पॉजिटिव असर पड़ेगा होगा और राजस्व घाटे में कमी नहीं होगी।
यह भी पढ़ें - बड़ा खुलासा : जानिये आखिर Govt क्यों बेच रही सरकारी कंपनियों में धड़ाधड़ हिस्सेदारी
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