नयी दिल्ली। पिछली सरकारों के मुकाबले मोदी सरकार ने ज्यादा तेजी और बड़ी मात्रा में सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए कदम उठाये हैं। सरकारी कंपनियों में विनिवेश के जरिये मोदी सरकार बड़ी रकम जुटा रही है। बल्कि इस बजट में तो अगले वित्त वर्ष के लिए सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर रिकॉर्ड पैसा जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की योजना वित्त वर्ष 2020-21 में पीएसयू या सरकारी कंपनियों में विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेच कर 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने की है। ये अब तक किसी भी एक वित्त वर्ष में पीएसयू कंपनियों में विनिवेश के जरिये पूँजी जुटाने का अब तक का सबसे बड़ा टार्गेट है। सरकार ने बजट 2020 में एलआईसी और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने का खास प्रस्ताव रखा है। वैसे बता दें कि एलआईसी कुछ एक उन चुनिंदा सरकारी कंपनियों में से है जो तगड़ा मुनाफा कमाती हैं। बावजूद इसके सरकार इसमें अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। इसी असमंजस पर अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान आया है।
यहां इस्तेमाल होगा पैसा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि विनिवेश के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाएगा, जिसका अर्थव्यवस्था पर कई तरह से पॉजिटिव असर पड़ेगा होगा और राजस्व घाटे में कमी नहीं होगी। अगले वित्तीय वर्ष के लिए 2.10 लाख करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें भारत पेट्रोलियम और एलआईसी की हिस्सेदारी बेचना शामिल है। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि विनिवेश से जुटाया गया धन इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगाया जायेगा।
सरकार की हो रही आलोचना
विनिवेश के जरिए पीएसयू कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने पर सरकार की आलोचना हो रही है। उस पर वित्त मंत्री ने सफाई दी कि इस तरह जुटाया जाने वाला पैसा राजस्व घाटे को कम करने के लिए नहीं है, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए है जिसका अर्थव्यवस्था पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है। वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान सरकार के राजकोषीय विस्तार के पिछले अनुभव को याद करते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले अनुभव से सीखा है और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पैसे की बर्बादी न करने का फैसला लिया है।
एलआईसी और आईडीबीआई बैंक से आयेंगे 90000 करोड़ रु
वित्तीय वर्ष 2020-21 के विनिवेश लक्ष्य में 90000 करोड़ रुपये एलआईसी) के आईपीओ और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेच कर हासिल किये जायेंगे। सरकार आईपीओ के जरिये एलआईसी की 10 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है, जिसके बाद एलआईसी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होगी। एलआईसी का आईपीओ वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही लाया जा सकता है। इस आक्रामक विनिवेश लक्ष्य के पीछे सरकार का एक उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2020-21 में राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 फीसदी तक रोकना है।
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