नयी दिल्ली। सरकार कई तरीकों से अपना राजस्व इकट्ठा करती है। सरकार को कई तरीकों से हजारों करोड़ रुपये की प्राप्ति होती है। ऐसी का एक जरिया है कोयला खदानों का। जी हाँ केंद्र सरकार ने कोयला खदानों की नीलामी के जरिये हजारों करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा किया है। आँकड़ों के मुताबिक सरकार ने वित्त वर्ष 2014-15 से कोयला खदानों की नीलामी के जरिये 4,972.73 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया है। 31 अक्टूबर 2019 तक के आँकड़ों के मुताबिक किसी एक वित्त वर्ष में देखें तो सरकार को कोयला खदानों की नीलामी के जरिये 2018-19 में सर्वाधिक 1,280.58 करोड़ रुपये की वसूली हुई। ये आँकड़े राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दिये हैं। जोशी ने बताया कि कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत अब तक 31 खदानों को नीलामी के माध्यम से आवंटित किया गया है।

कितना राजस्व कमाया है सरकार ने
2018-19 में सबसे अधिक 1,280.58 करोड़ रुपये से पहले केंद्र सरकार ने 2017-18 में कोयला खदानों की नीलामी के माध्यम से 1,115.02 करोड़ रुपये जुटाये थे। वहीं 2016-17 में यह आँकड़ा 1,018.11 करोड़ रुपये का रहा था, जबकि 2015-16 में सरकार ने कोयला खदान आवंटन के जरिये 663.774 करोड़ रुपये की पूँजी जुटायी थी। इसके अलावा 2014-15 में केंद्र सरकार को कोयले की खानों के आवंटन से 241.94 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। कोयला मंत्री ने कहा है कि आवंटित की गयी 31 खानों में 9 खानों का आवंटन विभिन्न कारणों से खत्म कर दिया गया है। बाकी 22 खानों में से 13 को उद्घाटन की अनुमति मिल गई है और 11 में कोयला उत्पादन हो रहा है।
कितना हुआ है कोयला उत्पादन?
जिन 11 खानों में कोयला उत्पादन हो रहा है उन्होंने 2015-16 से 31 अक्टूबर 2019 तक 3.23 करोड़ कोयले का उत्पादन किया है। इनमें चार उत्पादक खदानें छत्तीसगढ़ में हैं, दो मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में हैं, जबकि झारखंड में एक खदान है। बता दें कि भारत में 319.02 अरब टन कोयला रिजर्व है। इनमें ओडिशा में 79.29 अरब टन कोयला रिजर्व है, जो कुल राष्ट्रीय कोयला क्षमता का 25% है। 2018-19 में भारत का कोयला उत्पादन 7.9% की बढ़ोतरी के साथ 73.05 करोड़ टन रहा था।
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