नयी दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए एक बुरी खबर आयी है। 2019 की दूसरी छमाही में भारत की जीडीपी विकास दर में और गिरावट देखने को मिल सकती है। यह अनुमान लगाया है सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने। डीबीएस बैंक ने 2019 की दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमानित आँकड़ों में बताया है कि अप्रैल-जून तिमाही में 5% के मुकाबले साल दर साल आधार पर जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 4.3% रह सकती है। डीबीएस बैंक के मुताबिक आर्थिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण खपत क्षेत्र में कमजोरी के साथ प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियाँ सुस्त रह सकती हैं। डीबीएस बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि नये प्रोजेक्ट्स की घोषणाएँ काफी सालों के निचले स्तर पर पहुँच गयी हैं, इसके अलावा मध्यवर्ती और पूँजीगत वस्तुओं, उपभोक्ता टिकाऊ क्षेत्र में कमजोर माँग की कारण उत्पादन में भी सुस्ती आयी है। यानी इस समय स्थिति ऐसी है कि पिछली कई महीनों से चल रही आर्थिक सुस्ती अभी बरकरार रह सकती है।

क्या कहते हैं आरबीआई सर्वे?
रिपोर्ट में आरबीआई के सर्वेक्षणों का भी जिक्र किया गया है। आरबीआई के सर्वे के हवाले से बताया गया है कि आमदनी और रोजगार की हालत को लेकर कंज्यूमर सेंटीमेंट्स में गिरावट दिख रही है। वहीं डायरेक्ट और इन्डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस भी मांग में सुस्ती को दर्शाते हैं। इसके अलावा बैंकों और गैर-बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ भी सुस्त हुई है। तीसरी तिमाही के आर्थिक आँकड़े इसी सप्ताह आने वाले हैं।
रेटिंग एजेंसियों ने भी घटायी है अनुमानित विकास दर
डीबीएस बैंक से पहले कई रेटिंग एजेंसियाँ 2019 या चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की अनुमानित विकास दर घटा चुकी हैं। हाल ही में मूडीज ने 2019 के लिए भारत की विकास दर के लिए अपने पहले के 5.8% के अनुमान को घटा कर 5.6% कर दिया था। मूडीज ने 2020 के लिए भी भारत की जीडीपी दर के लिए अपने अनुमान को 6.7% से घटा कर 6.6% किया था। वहीं क्रिसिल ने क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर के लिए अपने अनुमान में 0.20% की गिरावट की थी। क्रिसिल ने 2019-20 के लिए यह अनुमान 7.1% से घटा कर 6.9% कर दिया है।
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