नयी दिल्ली। सरकार ने टैक्स चुकाने में हेराफेरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। वित्त मंत्रालय उन करदाताओं पर कार्रवाई करने की तैयारी में है जो जीएसटी रिफंड में अधिक क्लेम करते हैं, मगर इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर में अपनी आमदनी कम करके दिखाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय एक अभियान चलायेगा, जिसके जरिये इस तरह से टैक्स में हेराफेरी करने वालों की पहचान की जायेगी। वित्त मंत्रालय उन करदाताओं पर कार्रवाई करने की तैयारी में है, जो अपनी आय छिपाते हैं। यानी टैक्स चोरी पर सरकार की कड़ी नजर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टैक्स में हेराफेरी करने वालों की पहचान करने के लिए आईटी को निर्देश दिये गये हैं। टैक्स के मामले में हेराफेरी करने वालों की Data Analytics के जरिये पहचान की जायेगी।

क्या है सरकार का उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य इससे टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य हासिल करना है। आपको बता दें कि सरकार का अप्रत्यक्ष टैक्स क्लेक्शन के लिए 13.5 लाख करोड़ रुपये लक्ष्य है। दरअसल सरकार टैक्स बढ़ाने को लेकर कई तरह के उपाय कर रही है। तीन दिन पहले जीएसटी काउंसिल की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। जीएसटी कलेक्शन सितंबर में 19 महीनों के निचले स्तर पर पहुँच गया था। सरकार द्वारा कुछ उपाय करने के बाद यह नवंबर में दोबारा 1 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुँच सका।
31 दिसंबर तक भरें टैक्स
अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा है तो कम जुर्माने के साथ 31 दिसंबर तक भर दें। आईटीआर मार्च 2020 तक दाखिल किया जा सकता है। मगर 31 दिसंबर तक आईटीआर भरने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। पर उसके बाद जुर्माना दोगुना होकर 10,000 रुपये हो जायेगा। आयकर विभाग ने पिछले वित्त वर्ष के लिए आईटीआर भरने की आखरी तारीख 31 जुलाई तय की थी, जिसे 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया था। 31 अगस्त के बाद रिटर्न भरने वालों को जुर्माना भी देना पड़ेगा। 31 दिसंबर तक जुर्माना 5,000 रुपये है, जबकि इसके बाद यह 10,000 रुपये हो जायेगा।
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