नई दिल्ली। कोरोनावायरस के बाद लागू लॉकडाउन के बीच निजी कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय के फैसले को बदल दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा था कि लॉकडाउन के दौरान काम बंद होने के बावजूद कंपनियां अपने कर्मचारियों को पूरी सैलरी दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बदल दिया है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस मामले का हल प्राइवेट कंपनियों और उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को आपसी बातचीत से निकालना चाहिए।
यह भी पढ़ें : जान लें Gas Cylinder की एक्सपायरी डेट, फिर नहीं होगा हादसा
कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न हो
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह जुलाई 2020 के अंत तक उन कंपनियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करें जो अपने कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि यह मामला कंपनी और कर्मचारियों के बीच बातचीत से हल होना चाहिए।
राज्य सरकारों की जिम्मेदारी तय की
कोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी और उसके कर्मचारियों के बीच बातचीत करवाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को 4 हफ्तों का समय दिया है कि वह 29 मार्च के नोटिफिकेशन के कानूनी पहलू के बारे में बताए। गृह मंत्रालय ने 29 मार्च को ही प्राइवेट कंपनियों में अनिवार्य रूप से सैलरी देने से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया था।
लॉकडाउन से स्थितियां खराब
देश में लॉकडाउन के चलते इस वक्त निजी क्षेत्र की कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब है। ऐसे यह कंपनियां न सिर्फ वेतन में कटौती कर रही हैं, बल्कि कुछ कंपनियां तो लोगों की छंटनी तक कर रही हैं। कंपनियों का कहना है कि यह लॉकडाउन की वजह से है, क्योंकि उनकी कंपनियां चली नहीं। ऐसे में पूरा वेतन दे पाना काफी कठिन है।


Click it and Unblock the Notifications