नयी दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर से संबंधित बकाया का तीन महीने की समय अवधि के अंदर ही भुगतान करने को कहा है। साथ ही दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों से यह भी कहा है कि अगर आपको इस संबंध में किसी चीज पर सफाई चाहिए तो 13 दिसंबर तक संपर्क कर सकते हैं। ऐसा दूरसंचार विभाग ने इसलिए कहा है कि ताकि कंपनियाँ एजीआर के भुगतान में देरी न करें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों से कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये के बकाया एजीआर का भुगतान करने को कहा था। इसी एजीआर के लिए प्रोविजन बनाने के कारण जुलाई-सितंबर तिमाही में वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को जबरदस्त घाटा हुआ था। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के हाल ही में अपने मोबाइल चार्जेस बढ़ाने के पीछे भी एजीआर चुकाने के पैसे का दबाव ही है।

क्या है एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू
एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। दरअसल एजीआर को लेकर एक विवाद रहा है क्योंकि दूरसंचार विभाग के मुताबिक एजीआर की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी की कुल आय पर होनी चाहिए, जिसमें जमा ब्याज या संपत्ति बेचने सहित होने वाली आय भी शामिल है। वहीं टेलीकॉम कंपनियाँ सिर्फ टेलीकॉम सेवाओं की आमदनी पर एजीआर की बात कहती रही हैं। 2005 में सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दूरसंचार विभाग की परिभाषा का विरोध करते हुए TDSAT का रुख किया था, मगर उसने भी सभी तरह की आमदनी पर एजीआर की गणना को सही माना। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परिभाषा पर मुहर लगा दी है।
नॉन-टेलीकॉम कंपनियों को भी देना होगा एजीआर
बता दें कि उन नॉन-टेलीकॉम कंपनियों को भी एजीआर का बकाया चुकाना होगा, जिनका टेलीकॉम कारोबार बेहद छोटा है, मगर उनके पास लाइसेंस है। इनमें गेल, रेलटेल, दिल्ली मेट्रो और पावर ग्रिड जैसी सरकारी कंपनियाँ भी शामिल हैं। मामले में इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) सहित गैर-दूरसंचार कंपनियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क कर इस मुद्दे पर राहत की मांग की है।
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