नयी दिल्ली। सरकार आगामी तिमाही में छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दर में कटौती की जा सकती है। ये एक फैसला होगा, जिससे मौद्रिक नीति दरों में कटौती का रास्ता आसान हो जाएगा। बता दें कि दुनिया भर के कई बैंकों ने ब्याज दरें कम की हैं। हाल ही में आरबीआई ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें संभावना थी कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट घटाएगा। मगर आरबीआई ने ऐसा नहीं किया। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक अगले महीने होगी। जहां तक छोटी बचत योजनाओं का सवाल है तो सरकार ने मौजूदा तिमाही के लिए इन पर ब्याज दरें नहीं घटाईं। छोटी बचत योजनाओं में सार्वजनिक भविष्य निधि, किसान विकास पत्र, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और राष्ट्रीय बचत पत्र शामिल हैं।
बैंक करते हैं शिकायत
बैंक शिकायत करते हैं कि छोटी बचत योजनाओं पर ऊंची ब्याज दर होने के चलते वे जमा दरें कम नहीं कर पाते। वर्तमान में बैंकों की जमा दर और एक वर्ष की मैच्योरिटी वाली छोटी बचत योजना की दरों के बीच लगभग 1 फीसदी का अंतर है। इस हफ्ते की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ब्याज दर में कटौती पर कोई फैसला करेगी। साथ ही उन्होंने कहा था कि कोरोनोवायरस के झटका का मुकाबला करने के लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।
कितनी है मौजूदा ब्याज दरें
बता दें कि केंद्र सरकार ने पीपीएफ और एनएससी जैसी छोटी बचत योजनाओं पर जनवरी-मार्च तिमाही के लिए ब्याज दर 7.9 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया था। वहीं 113 महीनों वाले किसान विका पत्र की दर 7.6 फीसदी ही बरकरार रखी गयी थी। वहीं जनवरी-मार्च तिमाही के लिए सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.4 फीसदी की दर से ब्याज दिया जाएगा। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की फरवरी में हुई द्वि-मासिक बैठक में कहा गया था कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में एडजस्टमेंट की जरूरत है।
क्या चाहती है सरकार
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त मंत्रालय सरकारी बैंकों से कहता है कि आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में कटौती किये जाने का पूरा का पूरा लाभ खुदरा लोन पर दिया जाए ताकि खपत में इजाफा हो। मगर बैंक कहते हैं कि रेपो रेट में कटौती का 100 फीसदी लाभ रिटेल लोन पर देने से उनका मार्जिन प्रभावित होगा। आपको बता दें कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में संशोधन हर तिमाही में होता है।
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