नयी दिल्ली। एलआईसी से पहले केंद्र सरकार ने एक और पीएसयू कंपनी में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन या बीपीसीएल में अपनी पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोलियां मांगी हैं। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) की तरफ से जारी किये सर्कुलर के अनुसार बीपीसीएल में हिस्सेदारी खरीदने के लिए 2 मई तक बोली दाखिल की जा सकती है। वहीं रुचि रखने वाले निवेशक 4 अप्रैल तक अपने सवाल पूछ सकते हैं। सरकार बीपीसीएल के 114.91 करोड़ इक्विटी शेयर (जो 52.98 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है) बेचेगी। इसके साथ ही सरकार मैनेजमेंट कंट्रोल का भी हस्तांतरण करेगी। हालांकि बीपीसीएल की हिस्सेदारी में इसकी नुमालीगढ़ रिफाइनरी में 61.65 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी शामिल नहीं है।

कितनी होनी चाहिए संपत्ति
बीपीसीएल को खरीदने के लिए बोलीदाताओं के पास न्यूनतम 10 अरब डॉलर की शुद्ध संपत्ति होना चाहिए। यदि एक समूह में बोली दाखिल की जायेगी तो ग्रुप में अधिकतम 4 सदस्य हो सकते हैं। इनमें प्रमुख सदस्य का हिस्सा 40 फीसदी होना चाहिए, जबकि अन्य सदस्यों के पास न्यूनतम 1 अरब डॉलर की शुद्ध संपत्ति होनी चाहिए। सरकार ने बीपीसीएल की विनिवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और संभालने करने के लिए डेलॉयट टूचे टोहमात्सु को अपना लेनदेन सलाहकार नियुक्त किया है।
एलआईसी में भी बेची जायेगी हिस्सेदारी
गौरतलब है कि सरकार देश की प्रमुख बीमा कंपनी एलआईसी में भी हिस्सेदारी बेचेगी। इस प्रस्ताव की घोषणा इस बार के बजट में की गयी थी। सरकार एलआईसी का आईपीओ लेकर आयेगी, जिसके बाद इसे स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट लिया जायेगा। हालांकि एलआईसी के आईपीओ से पहले कुछ नियमों में बदलाव और संशोधन किया जायेगा, जिसमें कुछ महीने लग सकते हैं। इसके अलाला आईडीबीआई बैंक में भी सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। अगले वित्तीय वर्ष यानी 2020-21 के लिए 2.10 लाख करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भारत पेट्रोलियम, आईडीबीआई बैंक और एलआईसी की हिस्सेदारी बेचना उसी लक्ष्य का हिस्सा है।
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