नई दिल्ली। देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही बजट अनुमान के 83.2 फीसदी यानी 6.62 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण कोरोना वायरस महामारी तथा लॉकडाउन के कारण टैक्स कलेक्शन में गिरावट आना है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान पहली तिमाही के अंत में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 61.4 फीसदी के स्तर पर था। इस समय सरकार के ज्यादातर खर्च अधारी से ही पूरे हो रहे हैं।

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ये था बजट में अनुमान
फरवरी में पेश वित्तीय वर्ष 2020-21 के आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 7.96 लाख करोड़ रुपये यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 फीसदी रखा था। हालांकि, इन आंकड़ों को कोविड-19 संकट से उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के मद्देनजर संशोधित किया जा सकता है। लेखा महानियंत्रक परीक्षक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत में राजकोषीय घाटा 6,62,363 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
टैक्स वसूली में आई कमी
वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 फीसदी पर पहुंच गया था, जो 7 साल का उच्च स्तर पर था। यह मुख्य रूप से राजस्व संग्रह में कमी के कारण था। सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, इस साल सरकार की राजस्व प्राप्ति 1,50,008 करोड़ रुपये यानी बजट अनुमानों का 7.4 फीसदी रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 14.5 फीसदी थी।
जानिए सरकारी आंकड़े
वित्त वर्ष के पहले 3 महीनों के दौरान कर से प्राप्त राजस्व 1,34,822 करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान का 8.2 फीसदी रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान कर राजस्व अनुमान 15.2 फीसदी था। सरकार की कुल प्राप्तियां बजट अनुमान का 6.8 फीसदी यानी 1,53,581 करोड़ रुपये है। बजट में, सरकार ने कुल प्राप्तियों का अनुमान 22.45 लाख करोड़ रुपये लगाया था।
जून के अंत तक सरकार का कुल खर्च 8,15,944 लाख करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान का 26.8 फीसदी रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान कुल खर्च 25.9 फीसदी था।


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