नयी दिल्ली। बजट के बाद अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर आयी है। अर्थवव्यवस्था में मौजूदा मंदी के बीच जनवरी में देश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में जोरदार तेजी देखने को मिली। इससे देश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां 8 सालों के शिखर पर पहुँच गयी हैं। गौरतलब है कि नये कारोबार और उत्पादन में जबरदस्त तेजी और करीब 7.5 सालों की अवधि में सबसे तेज दर से रोजगार बढ़ने की उम्मीद से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां 8 सालों में सबसे अधिक रहीं। इस बात का खुलासा एक प्राइवेट सर्वे में हुआ है। आईएचएस मार्किट इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) जनवरी में बढ़ कर 55.3 हो गया, जो दिसंबर 2019 में 52.7 फीसदी रहा था। इससे पहले नवंबर 2019 में यह 51.2 रहा था। यह फरवरी 2012 के बाद यह पीएमआई का सबसे ऊँचा स्तर है। साथ ही लगातार 30वां महीना रहा जिसमें पीएमआई सूचकांक 50 के स्तर से अधिक रहा।

उपभोक्ता वस्तु सब-सेक्टर से बेहतर हुई मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां
उपभोक्ता वस्तुओं के सब-सेक्टर ने सबसे ज्यादा शानदार प्रदर्शन किया, जिसका असर पूरी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां पर पड़ा। हालांकि मध्यवर्ती वस्तुओं ग्रोथ सुस्त रही, मगर पूँजीगत वस्तुओं में फिर से तेजी देखने को मिली। नवंबर 2018 के बाद से नये निर्यात ऑर्डर में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गयी जिससे बाहरी बाजारों से मांग को मजबूत मिली और कुल बिक्री में वृद्धि हुई। निर्माताओं ने विशेष रूप से एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में ग्राहकों को सबसे अधिक बिक्री की।
आगे और भी बेहतर होंगे हालात
सर्वे बताता है कि भारतीय निर्माता 2020 में आगे उत्पादन के लिए और भी अधिक उत्साहित हैं। बेहतर मांग, नए ग्राहक, मार्केट प्रयास, क्षमता विस्तार और नए उत्पाद पेश करने के पूर्वानुमान से निर्माताओं में उत्साह है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीएमआई सूचकांक का 50 से ऊपर होना ग्रोथ का सूचक है, वहीं 50 से नीचे का लेवल संकुचन का संकेत है।
यह भी पढ़ें - अभिजीत बनर्जी : रिकॉर्ड राजकोषीय घाटे के बाद यह करे सरकार


Click it and Unblock the Notifications