नयी दिल्ली। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के मुताबिक भारत के रियल एस्टेट, निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र मुसीबत में हैं। राजन ने इन सेक्टरों की हालत पर चिंता जताते हुए इन्हें टाइम बम कहा है। उनके मुताबिक वे एनबीएफसी यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियाँ जो इन क्षेत्रों को कर्ज देती हैं उन्हें अपनी एसेट क्वालिटी की समीक्षा करनी चाहिए। राजन ने कहा है कि आरबीआई को एनबीएफसी की संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा करनी चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था में चल रही सुस्ती के बीच राजन ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में भारी संकट है। राजन के अनुसार भारत एक ग्रोथ रिसेशन में है, जिसकी अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ रही है और बेरोजगारी में इजाफा हो रहा है। आपको बता दें कि भारत की विकास दर सितंबर तिमाही में 4.5 फीसदी के 6 सालों से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुँच गयी। शैडो कर्जदाताओं के बीच संकट और बैंकों में बढ़े हुए बैड लोन से अर्थव्यवस्था में ऋण देने पर रोक लग गयी है।

आरबीआई की एनबीएफसी पर नजर
बीते गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई के मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि केंद्रीय बैंक शीर्ष पचास गैर-बैंक फाइनेंसरों पर कड़ी नजर रखता है, जो शैडो बैंकिंग क्षेत्र में कुल संपत्ति का लगभग 75% हिस्सा है। बहरहाल वित्तीय संकट और रियल एस्टेट में मंदी के कारण लगभग 66 अरब डॉलर की आवासीय परियोजनाएँ दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट जेएलएल के मुताबिक लगभग 4.54 लाख आवासीय इकाइयाँ विभिन्न कारणों से अपनी पूरी होने की डेट से पीछे पीछे चल रही हैं। सितंबर 2019 तक के आँकड़ों के मुताबिक रियल एस्टेट श्रेणी में कुल 115 दिवालिया मामले दर्ज हो चुके हैं।
जुलाई-सितंबर तिमाही में घटी घरों की बिक्री
आपको बता दें कि जुलाई-सितंबर तिमाही में साल दर साल आधार पर देश के मुख्य 35 शहरों में घरों की बिक्री 2% घटी। यह जानकारी हाल ही में अपनी रिपोर्ट में रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स कंपनी Liases Foras ने 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए अपनी आवासीय रियल एस्टेट मार्केट रिपोर्ट में दी थी। 2018-19 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बिके 93,426 मकानों के मुकाबले 2019-20 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 91,115 मकान बिके।
यह भी पढ़ें - एटीएम : फ्रॉड रोकने के लिए आरबीआई की बड़ी तैयारी
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