नयी दिल्ली। एटीएम स्किमिंग और क्लोनिंग की बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक ने एटीएम से लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिए नए उपाय की घोषणा की है। आरबीआई ने कहा कि कई बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएं कुछ एटीएम सुविधाओं की साझा सेवाओं के लिए थर्ड-पार्टी सेवा प्रदाताओं पर निर्भर हैं। यही सेवा प्रदाता संबंधित साइबर खतरों के संपर्क में होते हैं क्योंकि उनका एक्सपोजर पेमेंट सिस्टम में भी है। इसी के चलते आरबीआई ने जरूरी बेसलाइन साइबर कंट्रोल शुरू करने का फैसला किया है, जिसे बैंक और विनियमित संस्थाओं के लिए थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट में शामिल करना जरूरी होगा। आरबीआई के मुताबिक एटीएम स्विच ऐप्लिकेशनों के लिए साझा सेवाओं के लिए कई वाणिज्यिक बैंक, शहरी सहकारी बैंक और अन्य विनियमित संस्थाएँ थर्ड-पार्टी ऐप्लिकेशन सेवा प्रदाताओं पर निर्भर हैं। आरबीआई ने कहा है कि जरूरी दिशानिर्देशों से सेवा प्रदाताओं के लिए साइबर सुरक्षा के लिए कदम उठाना जरूरी हो जायेगा। उन्हें ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर में बदलाव करने होंगे।

नयी गाइडलाइंस 31 दिसंबर तक होगी जारी
आरबीआई ने कहा कि गाइडलाइंस के कारण सुरक्षा उपायों का एक्सेक्यूश, स्टोरेज पर कंट्रोल, संवेदनशील डेटा का ट्रांसमीशन, फोरेंसिक जांच के लिए कैपेसिटी बनाना और किसी धोखाधड़ी की घटना पर फौरन जरूरी कदम उठाना आवश्यक हो जायेगा। आरबीआई इस मामले से संबंधित दिशानिर्देश 31 दिसंबर तक जारी करेगा। दरअसल हाल के महीनों में एटीएम को लेकर धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गयी है, जिससे बैंक और आरबीआई हरकत में आ गये हैं। मामलों में नकली एटीएम बनाने जैसी घटनाएँ भी शामिल हैं।
एटीएम क्लोनिंग और एटीएम स्किमिंग
इसी हफ्ते कोलकाता का एक मामला सामने आया था, जिसमें जालसाजों ने एटीएम का क्लोन यानी डुप्लिकेट बना कर कई लोगों को ठग लिया। कोलकाता के जादवपुर में 30 से ज्यादा लोगों के खातों से लाखों रुपये ऐसे ही निकाल लिये गये। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में जादवपुर के सुकांता सेतु के आस-पास के बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उनके पास अपना एटीएम कार्ड होते हुए उनके खातों से पैसे निकाल लिये गये।
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