नयी दिल्ली। पीएम नरेन्द्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के ऐलान के साथ ही कहा था कि इस पैकेज के बारे में विस्तार से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बताएंगी। वित्त मंत्री ने कल यानी 13 मई को देश के छोटे कारोबारियों यानी एमएसएमई, एनबीएफसी और ईपीएफ योगदान पर कई बड़े ऐलान किए। इसी क्रम में आज किसानों और मजदूरों के लिए बड़े ऐलान किए गए। 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जानकारी दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही वित्त मंत्री ने कहा कि छोटे किसानों के अलावा प्रवासी मजदूरों और रेहड़ी पटरी वालों के लिए ऐलान किए जाएंगे।
किए गए बड़े ऐलान
प्रवासी श्रमिकों के लिए 3, मुद्रा योजना के अंदर 1 शिशु ऋण, रेहड़ी पटरी वालों के लिए 1, आवास के लिए 1, आदिवासियों के लिए 1, छोटे किसानों के लिए 2 ऐलान किए गए। साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि अगर हम एक निश्चित घटक के बारे में नहीं बोलते तो इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार किसी विशेष सेगमेंट के बारे में भूल गई है, बल्कि बेहतर पहल की घोषणा की जा रही है। उन्होंने कहा कि 3 महीनों में कृषि क्षेत्र के लिए 86600 करोड़ रुपये के लोन दिए गए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कई कदम उठाए गए और 25 लाख नए किसानों को क्रेडिट कार्ड दिए गए।
वित्त मंत्री के मुताबिक किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई। एमएसएमई को मदद से गरीबों को भी फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने 29500 करोड़ रुपये की मदद ग्रामीण बैंकों को दी। राज्यों ने भी किसानों की 6700 करोड़ रुपये से मदद की। राज्यों को आपदा फंड के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई। इसके अलावा कृषि उत्पादों के जरिए राज्यों ने किसानों की मदद की। गावों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 4200 करोड़ रुपये दिए गए। साथ ही शहरी गरीबों को 1100 करोड़ रुपए की मदद दी गई। बेघर लोगों को तीन वक्त का खाना मुहैया किया गया।
मजदूरों को रहने के लिए सस्ते किराए वाले घर मिलेंगे। प्रवासी मजदूरों के लिए किफायती घरों का ऐलान किया गया है। सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक स्कीम लॉन्च करेगी, जिसके तहत प्रवासी मजदूरों / शहरी गरीबों को कम किराए पर रहने के लिए घर मुहैया किए जाएंगे। जरूरतमंदों को सस्ते मकान मुहैया करने पर जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हम विनिर्माण और उद्योगों को अपनी संपत्तियों पर किफायती आवासों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
साथ ही मेट्रो शहरों में खाली इमारतों को हाउसिंग में बदलने की योजना पर भी काम कर रहे हैं। यह पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के माध्यम से रियायतकर्ता समझौतों के जरिए किया जाएगा, जिसमें कम किराया होगा। सरकार ने 3 करोड़ मास्क और 1.20 लाख लीटर सेनिटाइजर की भी व्यवस्था की, जिससे शहरी गरीब वर्ग के रोजगार की संभावनाएं बढ़ीं।
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