नयी दिल्ली। कोरोनावायरस के कारण कई हफ्तों से चल रहे लॉकडाउन से देश की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। एक तरफ गरीबों का जीवन प्रभावित हुआ है तो दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में छोटे-बड़े उद्योग-धंधे बंद हो गए। इससे अर्थव्यवस्था काफी नीचे आ गई है। कई रेटिंग एंजेंसियों ने भारत की विकास दर के जीरो या इससे भी नीचे पहुंचने का अनुमान लगाया है। अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने, गरीबों को राहत पहुंचाने और उद्योगों को फिर से चलाने के लिए सरकार ने देश के अब तक के सबसे बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया, जिसके बारे में आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तार से जानकारी दी। वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पैकेज के बारे में डिटेल देश के सामने रखी। वित्त मंत्री की घोषणाओं पर पीएम मोदी ने अपने रेस्पोंस में कहा कि इससे उद्योगों खास कर एमएसएमई की दिक्कतें दूर होंगी। पीएम ने कहा कि इससे कैशफ्लो बढ़ेगा और काराबोरियों को मजबूती मिलेगी।

फिक्की और सीआईआई ने की तारीफ
इस पैकेज की व्यापारिक संगठनों की एसोसिएशन फिक्की ने भी तारीफ की है। फिक्की की अध्यक्ष डॉ संगीता रेड्डी ने कहा है कि वित्त मंत्री की घोषणाएं और उपायों ने हमें विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार तैयार है और फ्रंट से भारत को कोरोना संकट से बाहर निकालने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सरकार के इन उपायों से भारत मजबूत होकर उभरेगा। एक कारोबारी संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक "प्रभावशाली पैकेज" पेश किया है जिसमें कई विवेकपूर्ण उपाय शामिल हैं।
पूर्व वित्त मंत्री ने निकाली कमियां
वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने कहा कि इस पैकेज में उन लाखों गरीब, भूखे और तबाह प्रवासी मज़दूरों के लिए कुछ भी नहीं है, जो अपने घरों को वापस जाने के लिए पैदल चले। एमएसएमई पर उन्होंने कहा कि पैकेज में अभी भी 6.3 करोड़ एमएसएमई कंपनियों को छोड़ दिया गया। उन्होंने एमएसएमई में 20000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लोन और 10000 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश का स्वागत किया। मगर साथ ही कहा है कि हमें इसके लिए नियम और शर्तें देखनी होंगी।


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