Dhanteras 2024 Making Charges On Gold: त्यौहार का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में सोने की खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। गोल्ड खरीदने से पहले आपको मेकिंग चार्ज के बारे में ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अक्सर ज्वैलर्स मेकिंग चार्ज मनमाना वसूल लेते हैं और आपको ठग भी लेते हैं। आपके साथ कोई ज्वैलर ठगी न कर पाएं इसके लिए आपको मेकिंग चार्ज के बारे में हम बताएंगे।

क्या होता है ज्वैलरी पर लगने वाला मेकिंग चार्ज? (Gold Buying Tips)
जब भी आप कोई सोने की ज्वैलरी खरीदते हैं तो उस सोने की ज्वैलरी बनाने से पहले सोने को पिघलाया जाता है और ज्वैलरी को बनाया जाता है। इस प्रकार से अलग-अलग तरह की ज्वैलरी फिर चाहे वह अंगूठी या किसी शेप क का सोने का जेवर हो। सोने से जो भी ज्वैलरी बनाई जाती है उसमें जो खर्च और मेहनत लगती है उसकी वजह से ही सोने की ज्वैलरी पर मेकिंग चार्ज लगाया जाता है। इस मेकिंग चार्ज को कुछ ज्वैलर्स वेस्टेज चार्ज भी कहते हैं। अगर किसी ज्वैलर ने सोने से कोई ज्वैलरी बनाई तो उस बनाने वाले की कारीगर के काम की कीमत होती है।
कितना देना पड़ता है सोने के जेवर पर मेकिंग चार्ज? (Making Charges on Gold Jewellery)
जब भी कोई ज्वैलरी खरीदता है तो उसकी खरीदी पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। उस ज्वैलरी की डिजाइन पर मेकिंग चार्ज तय होता है। अगर किसी सोने की ज्वैलरी में ज्यादा बारीकी से काम किया गया होगा तो उसका मेकिंग चार्ज ज्यादा देना होता है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी ज्वैलरी का मेकिंग चार्ज उसकी कीमत का 10 से 25 फीसदी तक होता है। अगर 1 लाख रुपये की कोई गोल्ड ज्वैलरी ली है तो इसपर 10 फीसदी मेकिंग चार्ज लगता है तो फिर आपको 1 लाख की बजाए 1 लाख 10 हजार देने पड़ेंगे। लेकिन, अगर आप दोबारा इस ज्वैलरी को बेचने जाएंगे तो फिर आपके मेकिंग चार्ज के रुपये काट लिए जाएंगे।
ऐसे करें मेकिंग चार्ज को कैलकुलेट (Gold Making Charges)
मेकिंग चार्ज को कैलकुलेट करने के लिए फार्मूला होता है। इस फार्मूले को जौहरी सोने के जेवर की अंतिम कीमत को कैलकुलेट करने के लिए करते हैं। अंतिम कीमत = {सोने की कीमत X (वजन ग्राम में)} + मेकिंग चार्ज + 3% जीएसटी + हॉलमार्किंग शुल्क - इस फार्मूले की मदद से आप सोने के जेवर पर लगने वाले मेकिंग चार्ज को समझ सकते हैं।
कैरेट के आधार पर सोने की कीमत तय होती है
ये भी ध्यान रखें कि सोने की कीमत आपके द्वारा खरीदे गए कैरेट पर निर्भर करेगी। यह 24KT, 22KT, 18KT, 14KT आदि हो सकता है। इनमें से हर एक की कीमत अलग-अलग होती है। सोना जितना शुद्ध होगा, उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी। इसलिए, 24KT सोना महंगा होता है और 14KT सस्ता होता है।
आमतौर पर, इनकी गणना प्रति ग्राम के आधार पर या प्रतिशत के आधार पर की जाती है। कुछ ज्वैलर्स दोनों का मिश्रण इस्तेमाल करते हैं। वे प्रचलित सोने की कीमत का 1% इस्तेमाल करते हैं और फिर प्रति ग्राम के आधार पर चार्ज करते हैं। आपको ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जौहरी द्वारा जारी किए गए बिल में सोने के जेवर से संबंधित सभी जानकारी शामिल हो।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार सोने के आभूषण के बिल में सोने की वस्तु की जानकारी, उसका शुद्ध वजन, कैरेट में शुद्धता और सोने की वस्तु की शुद्धता, तथा हॉलमार्किंग शुल्क की जानकारी होना चाहिए। अगर सोने के आभूषण में हीरा या अन्य रत्न हैं, तो धातु की कीमत बिल में अलग से दिखानी चाहिए।
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