Dabur Products: भारत की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में से एक डाबर इंडिया ने अपने कारोबार में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी अब अपने उन प्रोडक्ट्स को बंद करने जा रही है जो एक्सपेक्टेड प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यह फैसला कंपनी की नई विज़न रणनीति के तहत लिया गया है, जिससे डाबर को भविष्य के लिए मजबूत और कॉम्पटिटर बनाया जा सके।

खराब प्रदर्शन वाले प्रोडक्ट्स होंगे बंद
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने हाल ही में निवेशकों के साथ बातचीत में बताया कि कंपनी कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स और कैटेगरी से बाहर निकलेगी जो कंपनी के राजस्व में बहुत ही मामूली योगदान करते हैं। इनमें चाय, डाबर वीटा, वयस्क और शिशु डायपर के साथ कुछ सैनिटाइजिंग प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
इन सभी कैटेगरी का कंपनी की कुल बिक्री में 1% से भी कम हिस्सा है। ऐसे में कंपनी का मानना है कि इन पर समय और संसाधन खर्च करना फायदेमंद नहीं है। डाबर अब अपनी ताकत को उन ब्रांड्स पर केंद्रित करेगी जो पहले से मजबूत स्थिति में हैं और जिनमें ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं हैं।
प्रमुख ब्रांड्स पर होगा पूरा फोकस
डाबर की रणनीति अब उन ब्रांड्स को और मजबूत करने की है जिनकी सालाना बिक्री 500 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इनमें डाबर रेड टूथपेस्ट, रियल जूस, डाबर च्यवनप्राश, डाबर हनी, हाजमोला, डाबर आंवला, ओडोनिल और वाटिका जैसे नाम शामिल हैं। ये सात ब्रांड डाबर की कुल बिक्री का लगभग 70% हिस्सा रखते हैं।
कंपनी का प्लान है कि इन ब्रांड्स में लगातार निवेश करके उनकी बाजार में पकड़ और बढ़ाई जाए। नए प्रोडक्ट वेरिएंट्स, बेहतर मार्केटिंग और उपभोक्ताओं की जरूरत के हिसाब से इन ब्रांड्स को आधुनिक बनाया जाएगा।
हेल्थ और वेलनेस में 'बोल्ड मूव'
डाबर ने यह भी बताया है कि कंपनी हेल्थ और वेलनेस कैटेगरी में नए और अच्छे कदम उठाएगी। इसमें न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स, गमी विटामिन्स, हर्बल हेल्थ प्रोडक्ट्स और प्रीमियम बेवरेजेज जैसे आइडियाज पर काम किया जाएगा। डाबर का मानना है कि आने वाले समय में हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ेगी और कंपनी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
डिजिटल और क्विक कॉमर्स पर दोगुनी रफ्तार
डाबर अब ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और मॉडर्न ट्रेड जैसे नए जमाने के रिटेल चैनलों में अपना निवेश और फोकस बढ़ाएगी। कंपनी चाहती है कि उसके प्रोडक्ट्स ग्राहकों को जल्दी और आसानी से उपलब्ध हों खासकर शहरी क्षेत्रों में। इसके लिए डिजिटल टूल्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके साथ ही कंपनी ग्रामीण भारत में भी अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम कर रही है, जहां अभी भी बहुत बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। डाबर स्टॉकिस्ट नेटवर्क को भी और अधिक एफिशिएंट बनाने की योजना पर काम कर रही है ताकि निवेश पर बेहतर रिटर्न मिल सके।
भविष्य की तैयारी स्मार्ट और स्ट्रैटजिक अप्रोच
डाबर की यह नई रणनीति साफ तौर पर बताती है कि कंपनी अब अपने कोर बिजनेस पर अधिक ध्यान देना चाहती है। नॉन असरदार प्रोडक्ट्स को हटाकर और तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट्स में निवेश करके डाबर भविष्य के लिए खुद को मजबूत बना रही है। सीईओ मोहित मल्होत्रा का कहना है कि कंपनी ऐसे कदम उठा रही है जो उसे बाजार में ज्यादा कॉम्प्टीशन और लचीला बनाएंगे।
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