न्यूयॉर्क। कोरोना महामारी के कारण घटी मांग के चलते कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को शून्य डॉलर/बैरल से भी नीचे चली गई। इसका सबसे बड़ा कारण है कि कोई भी व्यापारी फिलहाल कच्चा तेल खरीदकर उसे अपने पास रखने की स्थिति में नहीं है। इसके चलत कल अमेरिका में दोपहर बाद के कारोबार में वॉल स्ट्रीट में शेयर भी लुढ़क गये। एसएंडपी 500 में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई। लेकिन सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल के बाजार में हुआ। जहां मई डिलीवरी अमेरिकी कच्चा तेल की कीमत शून्य से नीचे 3.70 डॉलर/बैरल पहुंच गई।

क्या है कीमत का शून्य के नीचे चला जाना
दरअसल, मई डिलीवरी के सौदे के लिये मंगलवार अंतिम दिन है और व्यापारियों को भुगतान करके डिलीवरी लेनी थी। लेकिन मांग नहीं होने और कच्चे तेल को रखने की समस्या के कारण कोई डिलीवरी लेना नहीं चाह रहा है। यहां तक कि जिनके पास कच्चा तेल है, वे पेशकश कर रहे हैं कि ग्राहक उनसे कच्चा तेल खरीद लें। साथ ही वे उसे प्रति बैरल 3.70 डॉलर की राशि भी देंगे। तकनीकी भाषा में इसे कच्चे तेल की कीमत शून्य डॉलर/बैरल से नीचे जाना कहते हैं। एक खबर के अनुसार, मई डिलीवरी के लिए यूएस बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमिडिएट की कीमत सोमवार को पहली बार शून्य से नीचे गिरी थीं।
कीमतें गिरने का यह है कारण
एजेंसी की खबर के अनुसार, मंगलवार को मई डिलीवरी के लिए कारोबार की अंतिम तिथि है। ऐसे में सोमवार को बाजार में कच्चा तेल की कीमत शून्य से नीचे 37.63 डॉलर/बैरल पहुंच गईं। मई डिलीवरी कच्चा तेल के दाम में गिरावट के लिए तकनीकी कारण बताया जा रहा है, जैसे मई डिलीवरी की तारीख नजदीक है। इसलिए उसमें लेन-देन कम हो रही है। कोरोना वायरस संकट के कारण कच्चे तेल की मांग में कमी आई है और तेल की सभी भंडारण सुविधाएं भी अपनी पूर्ण क्षमता पर पहुंच चुकी हैं। एसएंडपी ग्लोबल प्लैट्स के मुख्य विश्लेषक क्रिस एम. के अनुसार, तीन सप्ताह के भीतर कच्चे तेल के सभी टैंक भर जाएंगे। अमेरिकी कच्चा तेल की जून डिलीवरी में भी 14.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है, फिलहाल इसकी कीमत 21.32 डॉलर प्रति बैरल है। ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत 1.78 डॉलर घट कर 26.30 डॉलर/बैरल पहुंच गई है।
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