Crude Oil Consumption: इस समय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत क्रूड ऑयल है। इससे कई सारे पेट्रोलियम प्रोडक्ट बनते हैं, जिनमें स्किन केयर प्रोडक्ट भी शामिल हैं। यही कारण है कि जो भी देश अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाएगा उसे क्रूड ऑयल की उतनी ही ज्यादा जरूरत पड़ेगी। फिलहाल चीन दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोल आया तक में से एक है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि चीन का सबसे बड़ा पेट्रोल सप्लायर इस समय रूस बना हुआ है। हालांकि कुछ सालों के अंदर भारत चीन को इस मामले में पीछे छोड़ देगा।
हालांकि अब भारत की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ चुकी है और आगे आने वाले समय में इसमें लगातार तेजी का अनुमान लगाया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक 2 साल 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में एक और दावा किया जा रहा है कि साल 2027 तक भारत में क्रूड ऑयल की खपत सबसे ज्यादा हो जाएगी और यह इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ देगा।

अगर बात की जाए इस समय की तो भारत में रोजाना 50 लाख बैरल क्रूड ऑयल की खपत होती है। अगर 2027 तक भारत सबसे बड़ा क्रूड ऑयल इंपोर्टर बन जाता है, तो सबसे बड़ा कंज्यूमर होने की वजह से कच्चे तेल के बाजार में भारत की धाक बरकरार हो जाएगी।
यह अनुमान इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के द्वारा लगाया गया है। इस एजेंसी के मुताबिक आने वाले सालों में भारत सबसे तेजी से बढ़ाने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। ऐसे में इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक एनर्जी को बढ़ावा देने पर जोर होने के बावजूद क्रूड ऑयल की डिमांड में जबरदस्त बढ़त होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पेरिस में एक इंडियन एनर्जी विद ऑर्गेनाइज हुआ था जिसमें इंडिया के तेल मार्केट के आउटलुक को लेकर एक विशेष रिपोर्ट जारी की गई है। इसके तहत साल 2030 तक भारत में क्रूड ऑयल की डिमांड 66.4 लाख बैरल प्रतिदिन की हो जाएगी। जबकी 2023 में ये डिमांड करीब 54.8 लाख बैरल रोजाना के आसपास की है।
इस समय चीन में क्रूड ऑयल की डिमांड सबसे ज्यादा है और भारत इसमें दूसरे नंबर पर है। जानकारी के लिए बता दे कि पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि इस समय भारत के घरेलू खपत 50 लाखबैरल प्रतिदिन की है।
भारत क्लीन और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की पुरजोर कोशिश कर रहा है और इसमें काफी हद तक सफलता भी हासिल की है, लेकिन इसके बावजूद आने वाले भविष्य में क्रूड ऑयल की डिमांड में कमी देखने को नहीं मिल रही है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के निदेशक के मुताबिक साल 2027 तक भारत के वृद्धि दर चीन के आगे निकल जाएगी।
विशेषज्ञों के द्वारा माना जा रहा है कि भारत अभी अमेरिका और चीन के बाद सबसे बड़ा तेल का इंपोर्टर है। फिलहाल भारत अपने इस्तेमाल का 85 प्रतिशत दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है। आने वाले समय में अगर भारत के डोमेस्टिक ऑयल प्रोडक्शन में गिरावट दर्ज की जाती है, तो उसे बाहर से और ज्यादा तेल मांगना पड़ेगा। यही कारण है किआने वाले समय में भारत में क्रूड ऑयल की डिमांड 12 लाख बैरल प्रतिदिन के तक बढ़ सकती है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक 2030 तक भारत में रोजाना 66 लाख बैरल क्रूड ऑयल का इस्तेमाल किया जाएगा।
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