नयी दिल्ली। कोरोनावायरस देश के एक के बाद एक राज्य को बड़े स्तर पर प्रभावित करना शुरू कर चुका है। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सभी राज्स अपने स्तर पर तैयारियां और उपाय कर रहे हैं। मगर कोरोनावायरस के खतरे के कारण खाने-पीने और बाकी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होना शुरू हो चुकी है, जिसका असर आने वाले कुछ दिनों में देखने को मिल सकता है। दरअसल सरकारों द्वारा सुरक्षा के मद्देनजर उठाये जा रहे कदमों से पूरी आपूर्ति श्रृंख्ला पर असर पड़ेगा और नतीजे में महंगाई बढ़ेगी। यानी लोगों के साथ-साथ सरकार के सामने महंगाई भी एक बड़ी समस्या उभर कर सामने आ सकती है। जहां तक खाने-पीने के जरूरी सामान की बात है तो सब्जियों और फलों की सप्लाई पर सबसे अधिक असर पड़ने की खबर है।
कैसा रहेगा आगे का हाल
कोरोनावायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र की मंडियां हैं, जिन्हें हफ्ते में दो दिन बंद रखने का फैसला लिया गया है। इन मंडियों के बंद रहने का असर आने वाले हफ्ते में उत्तर भारत में देखने को मिलेगा। राजधानी दिल्ली की बात करें तो शहर में फलों की आपूर्ति जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र से और सब्जियों की आपूर्ति कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होती है। यानी फल और सब्जियां दिल्ली में बाहर से ही आती हैं। इसके अलावा बाकी राज्यों में दिल्ली की मंडियों से सामान भेजा जाता है। जिन राज्यों में दिल्ली से सामान जाता है उनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश शामिल है।
लॉकडाउन जैसे हो रहे हालात
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक कोरोनावायरस से बचने के किये जाने वाले उपायों से लॉकडाउन जैसे हालात हो गये हैं। इसी कारण एक-दूसरे राज्यों में जाना मुश्किल हो रहा है और आपूर्ति प्रभावित हो रही है। फिर भी जरूरी सामान आ-जा रहे हैं। मगर इस दौरान ट्रांसपोर्ट वाले स्थिति का लाभ ले रहे हैं। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ड्राइवरों और अन्य काम करने वालों की कम हो गई है, जो आपूर्ति में अड़चन का एक कारण हो सकता है। बता दें कि उत्तर भारत में प्याज, आलू और टमाटर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
प्याज के दाम ढाई गुना
इस समय देश के उत्तरी राज्यों में पिछले साल के इसी समय के मुकाबले प्याज के 2 से 2.5 गुना तक हैं। वहीं आलू के दाम भी दो गुना से ज्यादा है। हुआ ये है कि कोरोना के डर से दिल्ली, पंजाब और दिल्ली से लगे हरियाणा में रेस्टोरेंट बंद हो गये हैं, जिससे फलों और सब्जियों के बड़े उपभोक्ता बाजार से गायब हैं। इससे मांग-आपूर्ति का बैलेंस भी बिगड़ रहा है। थोक-खुदरा बाजार में सब्जियों और फलों की कीमतों में लगातार अंतर बढ़ रहा है।
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