नयी दिल्ली। बुधवार को सरकार ने दिवालिया कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी। आईबीसी (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019 के जरिये कानून के कई सेक्शनों में बदलाव किया गया है। इसके अलावा कानून में कुछ नये सेक्शन भी जोड़े गये हैं। नये नियमों के मुताबिक बिल्डरों को राहत मिलेगी। दिवालिया कानून के तहत अब घर खरीदार बिल्डर के खिलाफ उतनी आसानी से शिकायत नहीं कर पायेंगे, जितनी आसानी से अब तक हो सकती थी। नये बिल में कम से कम 100 घर खरीदारों या फिर परियोजना के 10 फीसदी लोगों के एक साथ शिकायत करने पर ही बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई होगी। अभी तक 1 लाख रुपये वाला फाइनेंशियल क्रेडिटर भी दिवालिया कानून के मुताबिक शिकायत कर सकता था। नया बिल केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था, जिसे कैबिनेट ने हरी झंडी दिखा दी है। नये नियमों के मुताबिक कंपनी के पुरानों प्रमोटरों के अपराधों के लिए उसके नये प्रमोटरों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

क्यों मिली बिल्डरों को राहत
बिल्डरों के आईबीसी कानून के गलत इस्तेमाल की कई खबरें आ रही थी, जिसके चलते सरकार ने इसमें बदलाव किये। वहीं जानकार कहते हैं कि किसी कंपनी के पुराने गड़बड़ी के मामलों की जिम्मेदारी न लेने के कारण खरीदार दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों में हिस्सेदारी नहीं खरीद रहे थे। इसलिए नये नियमों में नये प्रमोटरों कार्रवाई से छूट दे दी गयी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे मामले जल्दी निपटाने में मदद मिलेगी। साथ ही नये प्रमोटर की दिवालिया प्रक्रिया कंपनियों से गुजर रही कंपनियों में खरीदने में दिलचस्पी बढ़ेगी।
क्या है आईबीसी कानून
केंद्र सरकार ने 2016 में दिवालिया कानून बनाया था, जिसका उद्देश्य दिवालिया और दिवालियापन के लिए एक ही कानून बनाकर मौजूदा ढांचे को मजबूत करना था। इस कानून का उद्देश्य छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करना और व्यवसाय करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का था। कानून लागू होने के बाद से आरबीआई ने कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कदम उठाये हैं।
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