नई दिल्ली। संसद में आर्थिक सर्वे पेश होने के बादमुख्य आर्थिक सलाहकार डा. के वी सुब्रमण्यन ने एक पत्रकार वार्ता कर इसकी महत्वपूर्ण बातें बताईं। डा सुब्रमण्यन ने कहा कि सभी आर्थिक संकेत अर्थव्यवस्था में सुधार की ओर इशारा कर रहे हैं। इन्होंने अपने प्रजेंटेशन में अपनी इन बातों के समर्थन में कई आंकड़े पेश किए।
विलफुल डिफॉल्ट से दिक्कतें बढ़ीं
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार डा. के वी सुब्रमण्यन ने कहा है कि इसमें सुस्ती की वजह दुनिया की अर्थव्यवस्था का धीमापन भी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार डा. के वी सुब्रमण्यन ने कहा कि अगर विलफुल डिफॉल्ट के चलते काफी वेल्थ नष्ट हुई है। अगर ऐसा न हुआ होता तो सामाजिक सेवाओं पर ज्यादा राशि खर्च की जा सकती थी।

ये बताई मुख्य बातें
-वर्ष 2017 से आर्थिक सुस्ती का मुख्य कारण क्रेडिट में कमी का होना रहा है
-बैंक क्रेडिट में यह कमी क्रेडिट बूम के खुलासे के बाद देखी गई
-कंपनियों ने वर्ष 2008 से 2012 के दौरान लोन ज्यादा लिया लेकिन वर्ष 2013 से 2017 के दौरान निवेश कम किया
-13 तिमाही के बाद आर्थिक सुस्ती का पहिया तेजी की तरफ घूमने लगा है
-पब्लिक सेक्टर के बैंकों में गवर्नेंस को इंप्रूव करने की आवश्यकता है। साथ ही विश्वास को मजबूत करने के लिए सूचनाओं के और अधिक प्रवाह की जरूरत है
-इकोनॉमिक सर्वे ने नया बिजनेस शुरू करने, प्रॉपर्टी रजिस्टर करने, करों का भुगतान करने और अनुबंधों को लागू करने को आसान करने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई है
-प्याज जैसी कमोडिटी की वस्तुओं की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार के हस्तक्षेप निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं
-सर्वे में कहा गया है कि देश में कारोबार को आसान बनाने के लिए और अधिक सुधारों की आवश्यकता है
-इंडियन रेलवे दुनिया की सबसे ज्यादा पैसेंजर को ढोने का माध्यम बनी है।
-रेलवे ने 120 करोड़ रुपये वैल्यू की माल ढुलाई की
-रेलवे ने 840 करोड़ रुपये वैल्यू के पैसेंजरों की आवाजाही की
-इस वजह से यह दुनिया की सबसे बड़ी पैसेंजर करियर बन गई है
-वित्तीय घाटा बढ़ने का अनुमान जताया गया
-वर्ष 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच 2.62 करोड़ नए रोजगार के मौके पैदा हुए
-देश की बैलेंस ऑफ पेमेंट की स्थिति में सुधार
-करंट अकाउंट घाटा कंट्रोल में
-एफडीआई में बढ़त
-विदेश में रहने वाले भारतीयों ने ज्यादा पैसा देश में भेजा
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