मकान मालिक क्या समय से पहले खाली करा सकता है फ्लैट

Landlord and Tenant Rights: पिछले कुछ सालों में फ्लैट के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अक्सर लोग अपनी प्रॉपर्टी को बेचने की जल्दबाजी करते हैं। इस बात का खामियाजा हमेशा किरायेदार को उठाना पडता है। क्यूंकि अक्सर मकान मालिक बिना एग्रीमेंट का समय पूरा हुए ही किराएदार पर मकान खाली करने का दबाव बनाने लगते हैं। ऐसे कई मामले बीते कुछ दिनों में देखे गए हैं, जिसमें मकान मालिक एग्रीमेंट का समय पूरा होने से पहले ही फ्लैट खाली करने की बात करते हैं। बेंगलुरु सहित देश के कई बड़े शहरों में ऐसे मामले देखे जा रहे हैं।

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दरअसल आजकल रियल एस्टेट की कीमत आसमान छू रही हैं, ऐसे में मकान मालिक कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लिए जल्दबाजी करते हैं और कीमतों में आए उछाल का फायदा उठाना चाहते हैं। इसलिए वे किराएदार पर घर खाली करने का दबाव बनाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या मकान मालिक, फ्लैट बेचने के लिए एग्रीमेंट के तय समय से पहले घर को खाली करवा सकता है? हालांकि इस मुद्दे पर अभी एक्सपर्ट के पास भी कोई सीधा-सीधा जवाब नहीं है।

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि घर खाली करने वाली बात मकान मालिक और किराएदार के बीच हुए एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करती है। प्रॉपर्टी के मामले से जुड़े एडवोकेट बताते हैं कि 11 महीने के रेंटल एग्रीमेंट को सब रजिस्ट्रार के ऑफिस में रजिस्टर करना जरूरी नहीं होता। रजिस्ट्रेशन एक्ट के मुताबिक प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन तभी जरूरी होता है, जब उसे 1 साल या इससे ज्यादा समय के लिए लीज पर दिया जाता है। एग्रीमेंट के मुताबिक दोनों में कोई भी पार्टी नोटिस पीरियड को पूरा करने के बाद प्रॉपर्टी खाली कर सकती है। एग्रीमेंट में इस क्लॉज में बदलाव भी हो सकता है। ऐसे में मकान मालिक किराएदार को नोटिस दे सकता है,लेकिन वह नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद ही किराएदार को घर खाली करने को कह सकता है।

कानूनी जानकारी और वकीलों के मुताबिक अगर एग्रीमेंट में ऐसा क्लॉज नहीं है, तो किराएदार ऐसी नोटिस पर रोक लगवाने के लिए सिविल कोर्ट में भी जा सकता है। इसके लिए उसे मकान मालिक को लीगल नोटिस भेजना होगा। लेकिन अगर एग्रीमेंट रजिस्टर्ड है, तो किराएदार के लिए घर खाली किए जाने के नोटिस को चैलेंज करना मुश्किल हो जाता है। अक्सर 11 महीने के रेंटल एग्रीमेंट में भी दोनों पार्टियों रजिस्ट्रेशन करने से बचती हैं। इससे स्टैंप ड्यूटी पर आने वाला बड़ा खरचा भी बच जाता है।

दरअसल हर लीगल डॉक्यूमेंट पर आपको स्टैंप ड्यूटी चुकाना जरूरी होता है। मकान मालिक और किराएदार अक्सर एक्स्ट्रा खर्च से बचने के लिए एग्रीमेंट करवाते ही नहीं है, ताकि उन्हें स्टैंप ड्यूटी न चुकानी पड़े। ऐसे मामले अगर कोर्ट में जाते हैं तो कैसे की सुनवाई से पहले ही किराएदार पर जुर्माना लगा दिया जाता है। कोर्ट चाहे तो मकान मालिक पर भी जुर्माना लगा सकता है। क्योंकि एग्रीमेंट पर मकान मालिक के हस्ताक्षर भी हैं और यह उसकी जिम्मेदारी है कि 11 महीने से ऊपर के एग्रीमेंट पर स्टैंप ड्यूटी चुकाई जाए।

ऐसे सबसे ज्यादा मामले देश के हाइटेक सिटी बेंगलुरु में बढ़ रहे हैं। इसलिए वहां की लोकल गवर्नमेंट बॉडी को भी इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत पड़ी है। सेंट्रल गवर्नमेंट ने भी 2021 में मॉडल टेनेंसी एक्ट को मंजूरी दी थी। इसके तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में रेंट अथॉरिटी और रेंट कोर्ट बनाने का प्रस्ताव किया गया है। इन कोर्ट का काम मालिक और किराएदारों से जुड़े मसलों को हल करना होगा।

अभी तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और असम ने मॉडल टेनेंसी एक्टको ध्यान में रखकर अपने टेनेंसी एक्ट में कई बदलाव किए हैं।

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