Tik Tok Deal: लोकप्रिय सोशल वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक ने अमेरिका में अपने परिचालन को जारी रखने के लिए एक नए जॉइंट वेंचर के गठन की घोषणा की है। शॉर्ट वीडियो ऐप TikTok की पैरेंट कंपनी ByteDance ने Oracle, Silver Lake और MGX के साथ अपने अमेरिकी बिजनेस को बेचने की डील साइन की है।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा 22 जनवरी को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। शोउ ज़ी च्यू ने कर्मचारियों को पुष्टि की है कि बाइटडांस और टिकटॉक ने इस कंसोर्टियम (संघ) के साथ बाध्यकारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
च्यू ने कर्मचारियों को लिखे मेमो में कहा, "मैं इस अवसर पर आपकी निरंतर लगन और अथक कार्य के लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। आपके प्रयासों से हम उच्चतम स्तर पर काम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित होगा कि टिकटॉक अमेरिका और दुनिया भर में लगातार बढ़ता और फलता-फूलता रहे।" उन्होंने आगे कहा, "इन समझौतों के लागू होने के साथ, हमारा ध्यान वहीं रहना चाहिए जहां यह हमेशा अपने उपयोगकर्ताओं, रचनाकारों, व्यवसायों और वैश्विक टिकटॉक समुदाय को सेवा प्रदान करने पर रहा है।"
जॉइंट वेंचर में किसकी कितनी हिस्सेदारी
नए टिकटॉक अमेरिकी संयुक्त उद्यम का आधा हिस्सा निवेशकों के एक समूह के स्वामित्व में रहेगा, जिनमें ओरेकल, सिल्वर लेक और अमीराती निवेश फर्म एमजीएक्स शामिल हैं। इनमें प्रत्येक की 15% हिस्सेदारी होगी। मेमो के अनुसार, बाइटडांस के पास 19.9% और मौजूदा बाइटडांस निवेशकों के सहयोगियों के पास 30.1% हिस्सेदारी होगी।
मेमो में अन्य निवेशकों का नाम नहीं बताया गया है, और टिकटॉक व व्हाइट हाउस दोनों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यह नई संरचना सुनिश्चित करेगी कि कंपनी डेटा सुरक्षा समेत अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करे।
अमेरिकी उद्यम में सात सदस्यीय, अमेरिकी बहुमत वाला निदेशक मंडल होगा। यह "अमेरिकियों के डेटा और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा" के नियमों के अधीन होगा।
अमेरिका का टिककॉक से क्या दिक्कत थी?
अमेरिकी सरकार को TikTok को लेकर लंबे समय से गंभीर चिंताएं थीं। उनका मानना था कि ऐप का एल्गोरिद्म और करोड़ों अमेरिकी यूजर्स का डेटा चीन तक पहुंच सकता है। सरकार ने आरोप लगाया था कि TikTok की कंटेंट रिकमेंडेशन तकनीक चीनी सरकार के इशारे पर काम कर सकती है, जिससे अमेरिकी नागरिकों के विचारों को प्रभावित किया जा सकता है।
इन चिंताओं के कारण, अमेरिकी संसद ने TikTok को एक नया मालिक खोजने का अल्टीमेटम दिया था, असफल रहने पर ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया जाता।
कहां स्टोर होगा टिकटॉक का डेटा?
अब हुए नए समझौते के तहत, अमेरिकी यूजर्स का सारा डेटा अमेरिका में ही सुरक्षित रखा जाएगा, जिसकी देखरेख तकनीकी दिग्गज ओरेकल (Oracle) करेगा। इसका मतलब है कि TikTok की अमेरिकी टीम और सिस्टम पर अब किसी बाहरी देश का नियंत्रण नहीं रहेगा।
इस समझौते के तहत, TikTok का एल्गोरिद्म भी अब विशेष रूप से अमेरिकी डेटा का उपयोग करके फिर से विकसित किया जाएगा, ताकि उस पर किसी भी बाहरी सरकार या देश का प्रभाव न पड़ सके। अमेरिका के भीतर कंटेंट मॉडरेशन और ऐप की नीतियां भी नई अमेरिकी इकाई द्वारा ही संभाली जाएंगी।
दरअसल, TikTok पर प्रतिबंध का खतरा जनवरी 2025 तक मंडरा रहा था। पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें ByteDance को अमेरिका से बाहर निकलने का आदेश दिया गया था, जिससे ऐप को कुछ समय के लिए बंद होना पड़ा। बाद में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अस्थायी राहत दी थी। कई बार अंतिम तिथियां बढ़ाई गईं, लेकिन अब आखिरकार TikTok के लिए अमेरिका में एक सुरक्षित रास्ता मिल गया है।
टिकटॉक यूजर्स
अमेरिका में TikTok के 17 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 30 साल से कम उम्र के लगभग 43% अमेरिकी युवा समाचार पढ़ने या देखने के लिए TikTok का ही उपयोग करते हैं। यह समझौता TikTok और इसके करोड़ों अमेरिकी यूजर्स के लिए बेहद राहत भरी खबर है। इससे ऐप को अमेरिका में निर्बाध रूप से काम जारी रखने, विकसित होने और सुरक्षित संचालन का अवसर मिलेगा।
भारत में बैन है टिकटॉक
भारत के संदर्भ में, टिकटॉक को साल 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित कर दिया गया था। भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत कुल 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था, जिनमें TikTok भी शामिल था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि इन ऐप्स की गतिविधियां भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध थीं। इस सूची में सिर्फ TikTok ही नहीं, बल्कि Shareit, UC Browser, Kwai, Vigo Video और Clash of Kings जैसे कई अन्य लोकप्रिय ऐप्स भी शामिल थे।
अमेरिका में हुए इस समझौते का भारत में TikTok की स्थिति पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं के कारण 2020 में TikTok पर प्रतिबंध लगाया था। भारत का यह निर्णय अपने साक्ष्यों और आकलन पर आधारित है; इसलिए, केवल अमेरिकी निवेश या नए मालिकाना ढांचे से ऐप की भारत में वापसी की गारंटी नहीं मिलती। हालांकि, यदि अमेरिका की सुरक्षा संबंधी चिंताएं प्रभावी ढंग से हल होती हैं, तो इससे TikTok की वैश्विक छवि मजबूत हो सकती है और भविष्य में भारत में इसकी वापसी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। लेकिन अंतिम निर्णय पूरी तरह से भारत सरकार पर निर्भर करेगा।
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