घरेलू महिलाओं की दिक्कत दूर करने के आइडिया से मिला Business, अब हैं 35 हजार करोड़ रु जेब में

नई दिल्ली, सितंबर 10। विदित आत्रे और संजीव बरनवाल दोनों ने आईआईटी दिल्ली इंजीनियर की हैं। उनके द्वारा बनायी गयी मीशो ऐप आज दुनिया की 10 सबसे अधिक डाउनलोड की जाने वाली एप में से एक हैं। इस एप की डाउनलोड की बात करें तो इस एप ने फेसबुक जैसी बड़ी सोशल मीडिया एप को भी पिछे छोड़ दिया हैं तो फिर चलिए जानते हैं। मीशो एप की सफलता की कहानी और मीशो कैसे एक बड़ा ब्रांड।

मीशो की शुरुआत ऐसे हुई

मीशो की शुरुआत ऐसे हुई

आईआईटी दिल्ली में विदित आत्रे और संजीव बरनवाल साथ ही पढ़ते थे। विदित आत्रे वर्ष 2015 में इनमोबी कंपनी में काम करते होते थे और संजीव की नौकरी की बात करें तो वे सोनी कंपनी में काम करते थे। उन दोनों ने तभी कुछ करने का फैसला कर लिया था। इसलिए उन दोनों ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे कर वर्ष 2015 में फ़ैशनियर ऐप बनाया। इस ऐप की सहायता से व्यक्ति अपने पास की दुकान से कोई भी सामान को खरीद सकते थे। उन दोनों ने बहुत कोशिश की मगर उनकी एप का इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति ने नही किया।

आया एक नया आइडिया

आया एक नया आइडिया

फिर उन्होंने देखा कि बहुत से दुकान दार अपने ग्राहकों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर जब भी कोई नया प्रोडक्ट दुकान में तो उन्हें व्हाट्सएप के जरिए भेज दिया करते है। जिससे वही से ही दुकान दार को ऑर्डर मिल जाता है। देश ने 50 करोड़ से अभी अधिक ग्राहक सोशल मीडिया ने है। उन्हें महसूस हुआ कि यदि वे उन्हें ई-कॉमर्स की तरफ मोड़ दिया जाए तो फिर उनका काम हो सकता है। जिसके बाद उन्होंने इसी फैशनर को बदलकर मीशो लॉन्च कर दिया गया।

कमाई का साधन खरीद के साथ मिला

कमाई का साधन खरीद के साथ मिला

पुनर्विक्रेताओं को मीशो के माध्यम से कमाई का एक बेहतर विकल्प मिला, जिसमे बहुत अधिक मात्रा में महिलाएं थी। मीशों एक ऐसा जगह बन चुका हैं। जहा प्रोडक्ट, पेमेंट कलेक्शन और विपणन उपकरण सारे एक ही जगह पर एक साथ मिल जाता है। उदाहरण से समझते है। एक गृहिणी वह इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर अपने ग्राहकों को मीशो का प्रोडक्ट कैटलॉग सरलता से दिखा सकती है। वह से ऑर्डर प्राप्त करके मीशो के थोक विक्रेता से ऑर्डर भी प्लेस कर सकती है और समान सीधे कस्टमर्स के घर तक भेज सकते है और इसमें गृहिणी इसने आसानी से 10 प्रतिशत से अधिक कमिशन कमा सकती है।

इसकी वैल्यूएशन आज 35 हजार करोड़ के लगभग है

दोनों में पहली बार वर्ष 2016 में लगभग 2 करोड़ रूपये जुटाए थे। इसके बाद अभी तक 6 राउंड की फंडिंग में कुल लगभग 8 हजार करोड़ रु जुटाए जा चुके है। हम मीशो एप की वैल्यूएशन की बात करें तो लॉन्च होने के 6 वर्षो के भीतर ही इसकी वैल्यूएशन लगभग 35 हजार करोड़ रूपये के करीब पहुंच चुकी है। वर्ष 2020 में मीशो ने 315 करोड़ रु का रेवेन्यू जुटाया था।

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