Budget 2026: राज्यों को मिलेगा ज्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर? सरकार अधिक ब्याज-फ्री लोन देने की बना रही योजना

Budget 2026: साल 2025 खत्म होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस बीच अब आगामी वित्त वर्ष 2026-27 को लेकर बजट की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। सरकार अपने स्तर पर तमाम संगठनों और लोगों से राय ले रही है कि किन सेक्टर्स में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 1 फरवरी को 2026-27 का बजट पेश करने की उम्मीद है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी लंबित है।

बजट की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार 2026-27 के बजट में राज्यों को पूंजीगत परिसंपत्तियां (कैपिटल एसेट) विकसित करने के लिए लंबी अवधि के ब्याज-मुक्त ऋण देने पर विचार कर रही है। इकोनॉमिक टाइम्स (ET) में छपी खबर के अनुसार, ऐसे उत्पादक खर्चों का अर्थव्यवस्था पर उच्च गुणक (मल्टीप्लायर) प्रभाव पड़ेगा, जिससे आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

खबर में बताया गया है कि राज्यों के पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत आवंटन 2026-27 के लिए 1.8-2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष के 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। यह निर्णय राज्यों की बढ़ती पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।

Budget 2026

नए प्रस्ताव का औचित्य बताते हुए एक अधिकारी ने कहा, "राज्यों में कैपिटल खर्च का मल्टीप्लायर असर अक्सर केंद्र सरकार की संस्थाओं की तुलना में ज़्यादा होता है। इसका मतलब है कि राज्यों द्वारा किए गए कैपेक्स खर्च से ज़्यादा इकोनॉमिक डिविडेंड मिलता है।"

चालू वित्त वर्ष में किस राज्य को मिला कितना कैपेक्स ऋण?

मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए योजना के तहत राज्यों को दिए गए 1.5 लाख करोड़ रुपये में से, 27 नवंबर तक कुल 56,826 करोड़ रुपये 4,106 परियोजनाओं को पूरा करने हेतु वितरित किए गए हैं।

चालू वित्त वर्ष में उत्तर प्रदेश 8,465 करोड़ रुपये के कैपेक्स ऋणों के साथ योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जिसके बाद असम (5,042 करोड़ रुपये) और राजस्थान (4,113 करोड़ रुपये) का स्थान है। 2025-26 में अब तक ऋणों का उठाव धीमा रहा है, लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष की तरह ही अंतिम तिमाही में इसमें तेजी आने की उम्मीद है।

इस वित्तीय वर्ष के 1.5 लाख करोड़ रुपये के खर्च का लगभग एक-तिहाई हिस्सा उन शर्तों से जुड़ा है जिनके तहत राज्यों को विशिष्ट सुधार करने होंगे। आमतौर पर, अनटाइड (बिना शर्त वाले) ऋणों का उठाव तेजी से होता है, जबकि टाइड (शर्तों से बंधे) हिस्से का उठाव धीमी गति से होता है और इसमें अधिक समय लगता है।

2020-21 में शुरू हुई थी ब्याज-फ्री लोन की योजना

केंद्र ने यह योजना 2020-21 में शुरू की थी, जिसके तहत राज्यों को 50 साल का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कोविड-19 से तबाह हुई अर्थव्यवस्था को तेजी से बहाल करने हेतु पूंजीगत खर्च पर ध्यान केंद्रित करना था।

शुरुआती खर्च 11,830 करोड़ रुपये था, जिसे हाल के वर्षों में राज्यों के पूंजीगत खर्च को गति देने हेतु काफी बढ़ाया गया है। इस बढ़े हुए सार्वजनिक कैपेक्स ने महामारी के बाद कई क्षेत्रों में निजी निवेश की कमी को भी कुछ हद तक पूरा किया। वित्त मंत्री ने पहले कहा था कि कैपेक्स पर खर्च किए गए प्रत्येक 1 रुपये का अगले वर्ष अर्थव्यवस्था पर 2.45 रुपये और आगामी वर्षों में 3.14 रुपये का गुणक प्रभाव होता है।

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