Budget 2026: देश में बीमा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बीमा कंपनियां अब सरकार से और बड़े कदमों की मांग कर रही हैं। हाल ही में बीमा प्रीमियम पर जीएसटी को लेकर राहत मिलने के बाद अब बीमा उद्योग की नजर आयकर से जुड़े नियमों पर टिक गई है। कंपनियों का मानना है कि अगर टैक्स में थोड़ी और छूट दी जाती है, तो लोग ज्यादा बीमा लेने के लिए आगे आएंगे और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

जीवन बीमा पर टैक्स सीमा बढ़ाने की मांग
बिजनेस स्टैन्डर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल जीवन बीमा की उन पॉलिसियों पर टैक्स लगता है, जिनका सालाना प्रीमियम 5 लाख रुपए से ज्यादा होता है। यह नियम फरवरी 2023 से लागू है। बीमा सेक्टर का कहना है कि आज के समय में 5 लाख रुपए की सीमा काफी कम है, क्योंकि महंगाई और जरूरतें दोनों बढ़ चुकी हैं। इसलिए कंपनियां सरकार से इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने की मांग कर रही हैं, ताकि ज्यादा कवर लेने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
यूलिप निवेशकों के लिए राहत की उम्मीद
यूलिप यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान को लेकर भी बीमाकर्ताओं की मांग सामने आई है। उनका कहना है कि यूलिप की टैक्स फ्री मेच्योरिटी सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। अगर यह सीमा 5 लाख रुपए तक कर दी जाती है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और लोग लंबे समय के लिए निवेश करने को प्रोत्साहित होंगे।
सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा को बढ़ावा
बीमा कंपनियों का मानना है कि केवल निवेश ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा को भी मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए दोनों टैक्स सिस्टम में इन पॉलिसियों पर बेहतर टैक्स लाभ देने की मांग की जा रही है। इससे ज्यादा परिवार जीवन और स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आ सकेंगे।
80D के तहत छूट बढ़ाने की जरूरत
स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर भी उद्योग संतुष्ट नहीं है। अभी धारा 80D के तहत 60 साल से कम उम्र के लोगों को 25 हजार रुपए और वरिष्ठ नागरिकों को 50 हजार रुपए तक की छूट मिलती है। कंपनियों का कहना है कि इलाज का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में यह सीमा अब पुरानी हो चुकी है। अगर इसे बढ़ाया जाए, तो लोग बेहतर और ज्यादा कवर वाली पॉलिसी खरीद पाएंगे।
बजट से बड़ी उम्मीद
बीमा उद्योग को उम्मीद है कि आने वाला बजट बीमा को सस्ता, आसान और ज्यादा लोगों के लिए फायदेमंद बनाने में मदद करेगा। अगर टैक्स नियमों में राहत मिलती है, तो इसका सीधा फायदा आम लोगों को होगा और देश में बीमा कवरेज तेजी से बढ़ सकेगा।
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