बजट 2021-22 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोबाइल से लेकर पुरानी गाड़ियों, स्टार्टअप और अन्य सेक्टर को लेकर बहुत सारी बातें रखी। जाहिर सी बात है इसमें कुछ से आपको फायदा होगा तो कुछ से आपको नुकसान होगा।
नई दिल्ली: बजट 2021-22 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोबाइल से लेकर पुरानी गाड़ियों, स्टार्टअप और अन्य सेक्टर को लेकर बहुत सारी बातें रखी। जाहिर सी बात है इसमें कुछ से आपको फायदा होगा तो कुछ से आपको नुकसान होगा। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में वाहनों की मांग बढ़ी है। हालांकि नए साल के शुरुआत में ऑटो निर्माताओं ने लागत बढ़ने की बात कह वाहनों की कीमतों में इजाफा कर दिया था। मात्र 195 रुपये प्रति दिन खर्च पर लाएं Maruti की ये नई शानदार CAR

लेकिन 2021-22 के लिए पेश किया गया आम बजट भारतीय वाहन बाजार के लिए खुशखबरी लेकर आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2021-22 में स्टील उत्पादों पर आयात शुल्क को कम कर दिया गया है। इस असर यह होगा कि सभी तरह के वाहनों की कीमतों में एक से लेकर तीन फीसदी तक की कमी आ सकती है। वित्त मंत्री के इस एलान से वाहन खरीदारों को फायदा होगा और नई गाड़ियां अब सस्ती हो सकती हैं।
वाहनों की कीमतें हो सकती कम
सरकार ने आम बजट में स्टील उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को 12.5 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। जिसका सीधा असर दोपहिया वाहनों, सभी तरह के चार पहिया वाहनों कार, बस, ट्रक, ट्रैक्टर की कीमत पर पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में वाहनों की कीमतें कम हो सकती हैं। क्योंकि वाहनों के निर्माण में स्टील का मुख्य तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। वहीं ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों के निर्माण में 30 फीसदी से लेकर 60 फीसदी तक स्टील का इस्तेमाल होता है। नए साल के शुरुआत के साथ ही विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी थी। कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से उन्हें वाहनों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। वाहनों के उत्पादन लागत बढ़ने की सबसे मुख्य वजह स्टील के दामों का बढ़ना था। स्टील पर आयात शुल्क घटा दिया गया है तो ऑटो निर्माताओं की लागत में भी कमी आने उम्मीद है। ऐसे में जब वाहन बनाने की लागत कम होगी तो कंपनियां ग्राहकों के लिए इनकी कीमतें 1 फीसदी से लेकर 3 फीसदी तक घटा सकती हैं।
इन वाहनों को सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2021 में नई स्क्रैपेज पॉलिसी (वाहन कबाड़ नीति) का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से इस पॉलिसी को लेकर चर्चा हो रही थी। नई वाहन कबाड़ नीति के मुताबिक 15 साल पुराने वाणिज्यिक वाहनों (कमर्शियल व्हीकल) को स्क्रैप किया जाएगा यानी उन्हें सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं होगी। जबकि निजी वाहन (पर्सनल व्हीकल) के लिए इस अवधि को 20 वर्ष तय किया गया है। यानी अब पुराने वाहनों को 20 साल बाद स्क्रैप किया जा सकेगा। ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर बनाए जाएंगे जहां इन वाहनों को ले जाना होगा। निजी वाहनों को 20 साल बाद और कमर्शियल वाहनों को 15 साल बाद इन ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर पर ले जाना होगा।
वाहनों का करना होगा फिटनेस टेस्ट
नई पॉलिसी गाइडलाइंस के मुताबिक, 20 साल के बाद किसी भी वाहन को फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इतने पुराने वाहनों के लिए संभव है कि वो फिटनेस टेस्ट पास कर फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त कर लें। हर एक फिटनेस टेस्ट पर करीब 40,000 रुपये का खर्च आएगा। यह रोड टैक्स के अतिरिक्त होगा और संभवत: 'ग्रीन टैक्स' भी देना पड़ेगा। ग्रीन टैक्स वाहनों के 15 साल पुराने होने के बाद वाहन रजिस्ट्रेशन के समय देना होगा। प्रत्येक फिटनेस सर्टिफिकेट अगले 5 साल के लिए लागू होगा। इसके बाद वाहन मालिक को एक और फिटनेस टेस्ट कराना होगा और इसके लिए भी लगभग पहले फिटनेस टेस्ट जितना ही खर्च करना होगा।
ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने नई वाहन कबाड़ नीति को पेश किए जाने पर स्वागत किया है। फाडा का अनुमान है कि अगर 1990 को आधार माना जाए तो करीब 37 लाख वाणिज्यिक वाहन (कमर्शियल व्हीकल) और लगभग 52 लाख यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) नई वाहन कबाड़ नीति के दायरे में आ जाएंगे। फाडा का कहना है कि एक अनुमान के आधार पर 10 फीसदी वाणिज्यिक वाहन और 5 फीसदी यात्री वाहन फिर भी सड़कों पर चलते रह सकते हैं। हमें अभी सभी तरह के प्रोत्साहनों को ठीक से देखने और समझने की जरूरत है। कुल मिलाकर इससे ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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