नई दिल्ली। आर्थिक सुस्ती की खबरों के बीच आज से बजट सत्र की शुरुआत हो रही है। इस दौरान सबसे पहले आज इकोनॉमिक सर्वे प्रस्तुत किया जाएगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति का हाल पता चलेगा। इसके बाद कल यानी 1 फरवरी 2020 को देश का बजट पेश किया जाएगा। बजट कल सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। यह बजट 2020-21 होगा। इसमें अगले साल सरकार की योजनाएं क्या रहेंगी यह पता चलेगा। इस बार बजट में लोगों को इनकम टैक्स की छूट का इंतजार है। इससे पहले आज सुबह 11 बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के सेंट्रल हॉल में दोनों सदन को संबोधित करेंगे। इसी के साथ बजट सत्र की शुरुआत हो जाएगी। ऐसी उम्मीद है कि इस इकोनॉमिक सर्वे में जीडीपी की दर 6 फीसदी से लेकर 6.5 फीसदी तक की रखी जा सकती है।

दो भागों में होगा बजट सत्र
इस बार बजट सत्र को 2 भागों में बांटा गया है। पहला सत्र 31 जनवरी 2020 से शुरू होकर 11 फरवरी 2020 तक चलेगा। वहीं दूसरा सत्र 2 मार्च 2020 से शुरू होकर 3 अप्रैल 2020 तक चलेगा।
आज पेश होगा इकोनॉमिक सर्वे
बजट सत्र की शुरुआत में आज 11 बजे संसद में इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय तैयार करता है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यन की अगुवाई वाली टीम ने तैयार किया है। इस इकोनॉमिक सर्वे को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मंजूरी के बाद संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। इस रिपोर्ट कार्ड में पिछले 1 साल में देश की अर्थव्यवस्था के हालात कैसे रहे, विकास की योजनाओं पर किस तरह से काम किया गया, ऐसे में सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जाती है।
इस बार इकोनॉमिक सर्वे की थीम है वेल्थ क्रिएशन
इस वर्ष इकोनॉमिक सर्वे की थीम वेल्थ क्रिएशन रखी गई है। इसमें सरकार ने इस वित्त साल में विकास की दर 5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो कि पिछले 11 सालों में सबसे निचला स्तर है।
क्या होता है इकोनॉमी सर्वे
इकोनॉमी सर्वे हर साल बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है। यह इकोनॉमी की आधिकारिक रिपोर्ट होती है। इस साल फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण इकोनॉमिक सर्वे पेश कर रही हैं। इसके अगले दिन 1 फरवरी को बजट पेश होने वाला है।
इकोनॉमी सर्वे में क्या बताया जाता है
इकोनॉमी सर्वे एक रिपोर्ट होती है जिसमें यह बताया जाता है कि अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है। इसके लिए क्या संभावनाएं और चुनौतियां हैं। इसमें अलग-अलग सेक्टर की राय और सुधार के उपायों का जिक्र होता है। कुल मिलाकर इकोनॉमी सर्वे भविष्य में बनने वाली पॉलिसी का आधार होता है।
क्या सरकार इकोनॉमिक सिफारिशें मानने के लिए बाध्य है
इकोनॉमिक सर्वे में जो भी सिफारिशें की गई हैं, सरकार उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है। यह सर्वे सरकार के लिए सिर्फ पॉलिसी गाइड की तरह है। पहले भी इकोनॉमिक सर्वे ऐसे आए हैं जिसमें सरकार की सोच और अर्थशास्त्रियों की सोच एकदम अलग होती है। ऐसा कई बार होता है जब सर्वे की सिफारिशों का असर बजट पर नजर नहीं आता है।
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