बेर वाले अंकल : बेर की बागवानी से कमा रहे हर साल 45 लाख रुपये

नयी दिल्ली। अकसर किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के लिए खिलाफ प्रदर्शन करने पर उतर आते हैं। इसकी कई वजह हैं, जिनमें फसलों का सही दाम न मिलना जैसी चीजें शामिल हैं। मगर कई कहानियां ऐसी भी सामने आती हैं, जिनमें किसानों के लाखों-करोड़ों रुपये कमाने का जिक्र होता है। ऐसी ही एक और कहानी सामने आयी है जिसमें बेर की बागवानी से एक किसान साल में लाखों रुपये कमा रहा है। हरियाणा के एक गांव अहिरका के रहे वाले सतबीर पूनिया केवल बेर की बागवानी से लाखों रुपये कमा रहे हैं। बेर के कारोबार से वे इतना प्रसिद्ध हो चुके हैं कि उन्हें लोग बेर वाले अंकल के नाम से जानते हैं। सतबीर की सालाना कमाई 45 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इतना ही नहीं अब वे 20 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। यह भी तब जब उनके जिले जींद में पानी की बहुत सम्स्या है। आइये जानते हैं कि कैसे वे इतने सफल हुए।

पानी की कमी के कारण बदला खेती का तरीका

पानी की कमी के कारण बदला खेती का तरीका

57 वर्षीय सतबीर के पास 16 एकड़ जमीन है, जिस पर पुराने तरीकों से ही खेती करते थे। मगर पानी की समस्या, ज्यादा लागत और अधिक मुनाफा न होने के कारण उन्होंने खेती करना छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपने खेत को ठेके पर दे दिया। साथ ही खुद भी दूसरा काम करने लगे। फिर एक बार उन्होंने पीएम मोदी की बात सुनी, जिसमें उन्होंने बताया कि खेती के अन्य विकल्पों के जरिये फलों और बागवानी करके किसान बेहतर तरक्की कर सकते हैं। इसके बाद उन्होंने कृषि जागरूकता कार्यक्रमों में इस बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की।

2017 में शुरू की बेर की बागवानी

2017 में शुरू की बेर की बागवानी

इसके बाद सतबीर ने अप्रैल 2017 में शुरुआत में पांच एकड़ पर थाई एप्पल प्रजाति के बेर, आठ एकड़ में उन्नत किस्म के अमरूद और दो एकड़ में नींबू से शुभारंभ किया। नतीजा यह हुआ कि उनकी फसल अच्छी हुई, जिसके लिए उन्हें बाजार भी बढ़िया मिल गया। शुरुआत में आस-पास और उनके परिवार तक के लोग बेर की बागवानी पर टीका टिप्पणी करते थे। मगर आज वे इतना मशहूर हो चुके हैं लोग उनके बागों को देखने के लिए आते हैं। इतना ही नहीं उनकी कामयाबी राज्य स्तर तक पहुंच चुकी है। पिछले साल हरियाणा के कृषि मंत्री ने उन्हें सम्मानित भी किया।

क्या है सतबीर की तकनीक

क्या है सतबीर की तकनीक

बता दें कि सतबीर का गांव जींद जिले में है, जहां जमीन के नीचे पानी कम है। इस समस्या को सुलझाने के लिए सतबीर ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने नहर के पानी को जमा करने का सोचा, जिसके लिए 21 लाख लीटर पानी की क्षमता का टैंक तैयार किया। इसके बाद उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम से सिंचाई शुरू की। अब उनका कारोबार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि वे केवल मंडी पर आश्रित नहीं हैं, बल्कि सतबीर ने शहर में खुद के 5-6 स्टोर खोल लिये हैं। बेर की फसल 15 मार्च के करीब बाजारों में आती है। मगर वो जो थाई एप्पल बेर उगाते हैं उसका प्रोडक्शन जनवरी में ही शुरू हो जाता है। कॉम्पिटीशन न होने का भी उन्हें फायदा मिलता है। उनकी फसल 50 रुपये प्रति किलो तक बिकती है।

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