अगर आपका खाता बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक में है तो आपके लिए अच्छी खबर है। सरकारी क्षेत्र के दो बैंकों, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने ग्राहकों को खुशखबरी दी है।
नई दिल्ली: अगर आपका खाता बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक में है तो आपके लिए अच्छी खबर है। सरकारी क्षेत्र के दो बैंकों, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने ग्राहकों को खुशखबरी दी है। Bank Holiday: जानिए अक्टूबर में कितने दिन बंद रहेंगे बैंक ये भी पढ़ें

इन दोनों बैंकों, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक ने कर्ज के लिए धन की सीमांत लागत यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लैंडिंग रेट आधारित अपनी मानक दरें (एमसीएलआर) 0.10 फीसदी तक कम कर दी हैं। इसके बाद इनके ग्राहकों को पहले से कम लागत पर लोन मिल सकेंगे जो मौजूदा समय में लोगों के लिए काफी जरूरी है।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लोन की नई दरें
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अनुसार उसने एक साल और छह माह के कर्ज पर एमसीएलआर क्रमश: 7.40 फीसदी से घटाकर 7.30 फीसदी और 7.30 फीसदी से 7.25 फीसदी कर दी हैं। बैंक की नयी दरें सोमवार से लागू हो गई हैं। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने एक दिन के, एक माह और तीन माह के कर्ज के लिए एमसीएलआर संशोधित कर क्रमश: 6.80 फीसदी, 7 फीसदी और 7.20 फीसदी किया है। बैंक ने नई ब्याज दरों को 7 सितंबर 2020 से प्रभावी कर दी है।
इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी एमसीएलआर घटाया
इंडियन ओवरसीज बैंक ने कोरोना संकट के काल में जहां लोग सैलरी संकट से जूझ रहे हैं। वहां इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ने अपने सीमांत ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने सभी अवधि के लिए लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने सीमांत दरों (एमसीएलआर) दरों में 10 बेसिक प्वाइंट में कटौती की है। बैंक ने 1 साल के लोन के लिए एमसीएलआर की दर को 7.65 से घटाकर 7.55% कर दिया है। वहीं 6 महीने के लोन के लिए ब्याज दरों को घटाकर 7.55 फीसदी कर दिया है। जबकि तीन माह वाले ब्याज दरों को घटाकर 7.45 फीसदी कर दिया है। बैंक की नई ब्याज दरें 10 सितंबर से लागू होगी।
सस्ता हो जाएगा होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन
बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक के इस कदम के बाद ग्राहकों का होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ता हो जाएगा। गौरतलब है कि एमसीएलआर घटने से मौजूदा लोन सस्ते हो जाते हैं। ग्राहकों को पुरानी ईएमआई के मुकाबले घटी हुई ईएमआई देनी पड़ती है।
बता दें कि रिजर्व बैंक के लगातार रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कटौती की वजह से बैंकों पर दबाव है कि वो अपने कर्ज की दरें घटाएं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस समय लोन लेने के लिए आगे आएं और अर्थव्यवस्था में पैसे का रोटेशन चलता रहे। कोरोना वायरस महामारी और देश में पिछले कुछ महीनों में लागू लॉकडाउन के चलते कामकाज पर बुरा असर पड़ा है और लोग लोन भी कम ले रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक का ये प्रयास है कि अधिक लोग लोन लें और इसके लिए बैंकों को भी लगातार दरें घटाने के लिए कहा जा रहा है।
क्या होता है एमसीएलआर
एमसीएलआर को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं। इसके तहत बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं। ये बेंचमार्क दर होती है। इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं। इसके साथ ही एमसीएलआर घटने पर लोन की ईएमआई सस्ती हो जाती है।
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