नयी दिल्ली। लगातार तीन महीने तक गिरने के बाद नवंबर 2019 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी नवंबर में 1.8 फीसदी की दर से बढ़ा। आईआईपी को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुए सुधार से सहारा मिला है। इससे पहले नवंबर 2018 में आईआईपी सिर्फ 0.2 फीसदी रही थी। जबकि 2019 में अगस्त से अक्टूबर तक यह नकारात्मक रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय या एनएसओ के मुताबिक पिछले साल नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ 2.7 फीसदी रही, जो नवंबर 2018 में 0.7 फीसदी रही थी। हालांकि अगर अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में देखें तो आईआईपी ग्रोथ में तगड़ी गिरावट आयी है। 2018 में अप्रैल-नवंबर के दौरान आईआईपी ग्रोथ 5 फीसदी रही थी, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह सिर्फ 0.6 फीसदी रही।

कितने सेक्टरों में हुई ग्रोथ
एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2019 के दौरान उससे पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 में से 13 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई। बिजली उत्पादन में गिरावट दर्ज की गयी। नवंबर 2018 में 5.1 फीसदी के मुकाबले नवंबर 2019 में इस सेक्टर में 5 फीसदी की गिरावट आयी। वहीं खनन क्षेत्र का उत्पादन -2.7 फीसदी के मुकाबले -1.7 फीसदी रहा। इसके अलावा नवंबर 2019 में पूंजीगत वस्तु उत्पादन -8.6 फीसदी रहा, जो नवंबर 2018 में -4.1 फीसदी रहा था। वहीं इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग सामान कैटेगरी -3.5 रहा।
क्या होती है आईआईपी ग्रोथ
जानकारी के लिए बता दें उद्योगों के उत्पादन के आंकड़े को ही औद्योगिक उत्पादन कहते हैं। बुनियादी तौर पर इसमें तीन बड़े सेक्टर शामिल किए गये हैं, जिनमें पहला सेक्टर है मैन्युफैक्चरिंग यानी उद्योगों में जो बनता है जैसे स्टील, सीमेंट, गाड़ी, कपड़ा, आदि। दूसरे नंबर पर खनन यानी इसमें कोयले और खनिज जैसी चीजों का माइनिंग किया जाता है। वहीं तीसरा है उपयोगिता। इसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें शामिल हैं, जिनमें सड़कें, बांध और पुल आदि शामिल हैं।
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