इलाहाबाद बैंक ने भी लोन लेना सस्ता किया। सार्वजनिक क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक ने विभिन्न मैच्योरिटी पीरियड के लिए अपने एमसीएलआर में 0.05 फीसदी की कटौती कर दी है।
नई दिल्ली: इलाहाबाद बैंक ने भी लोन लेना सस्ता किया। सार्वजनिक क्षेत्र के इलाहाबाद बैंक ने विभिन्न मैच्योरिटी पीरियड के लिए अपने एमसीएलआर में 0.05 फीसदी की कटौती कर दी है। बता दें कि नई दरें शनिवार यानी 14 दिसंबर से लागू होंगी। इलाहाबाद बैंक ने कहा कि बैंक की संपत्ति देनदारी प्रबंधन समिति ने मौजूदा एमसीएलआर की समीक्षा के बाद विभिन्न मैच्योरिटी पीरियड के लिए इसमें 0.05 फीसदी की कटौती का फैसला किया। वंदे भारत: वैष्णो देवी के लिए शुरू हुई स्पेशल ट्रेन, जानिए कितना है किराया ये भी पढ़ें

बैंक ने बृहस्पतिवार को शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा कि बेंचमार्क एक साल की एमसीएलआर अब घटकर 8.30 फीसदी रह गई है। पहले यह 8.35 फीसदी थी। एक साल की एमसीएलआर वह मानक दर है, जिस पर ज्यादातर उपभोक्ता कर्ज मसलन वाहन और व्यक्तिगत कर्ज की ब्याज दरें तय होती हैं। वहीं शेष परिपक्वता अवधि मसलन एक दिन से लेकर छह माह तक के कर्ज के लिए एमसीएलआर 7.80 फीसदी से 8.15 फीसदी रहेगी।
इन बैंकों का भी कर्ज हुआ सस्ता
मालूम हो कि इलाहाबाद बैंक के अलावा एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा भी अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट्स (एमसीएलआर) में कटौती कर चुके हैं। एसबीआई ने 1 साल अवधि वाले कर्ज के लिए एमसीएलआर 0.10 फीसदी घटाई है। अब इस अवधि के कर्ज पर ब्याज दर 8 फीसदी सालाना से घटकर 7.90 फीसदी सालाना पर आ गई है। एसबीआई की नई ब्याज दर 10 दिसंबर 2019 से प्रभावी होगी। एचडीएफसी बैंक ने सभी कर्ज अवधि के लिए एमसीएलआर में 0.15 फीसदी की कटौती की है। नए रेट 7 दिसंबर 2019 से लागू हो गए हैं। बैंक ऑफ इंडिया ने एमसीएलआर में 0.20 फीसदी की कटौती की है, जो 10 दिसंबर 2019 से लागू हो गई है।
क्या होता है एमसीएलआर?
अप्रैल 2016 से लोन पर ब्याज की जगह बैंकों में एमसीएलआर का इस्तेमाल करना शुरू किया गया था। जब आप किसी बैंक से कर्ज लेते हैं तो बैंक द्वारा लिए जाने वाले ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है। आधार दर से कम दर पर बैंक किसी को लोन नहीं दे सकता। इसी आधार दर की जगह पर बैंक एमसीएलआर का इस्तेमाल करने लगे। इसकी गणना लोन की राशि की सीमांत लागत, आवधिक प्रीमियम, संचालन खर्च और नकदी भंडार अनुपात को बनाए रखने की लागत के आधार पर की जाती है। बाद में इस गणना के आधार पर लोन दिया जाता है। यह आधार दर से सस्ता होता है। इस वजह से होम लोन जैसे लोन्स भी इसके लागू होने के बाद से काफी सस्ते हुए।
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