नयी दिल्ली। टेलीकॉम सेक्टर में एजीआर (Adjusted Gross Revenue) को लेकर काफी समय से खींचतान चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के बीते शुक्रवार को आये सख्त फैसले के बाद ये मामला अब हल हो सकता है। हालांकि प्रमुख दो कंपनियों एयरटेल और वोडाफोन की एजीआर चुकाने को लेकर हालत खराब है। इस बीच भारती एयरटेल और वोडाफोन ने अपने बकाया एजीआर का आकलन किया है। इन कंपनियों ने पाया है कि इनका बकाया एजीआर दूरसंचार विभाग की तरफ से मांगी गयी राशि के मुकाबले आधा है। एयरटेल और वोडाफोन के इस नये आकलन से एक नया विवाद हो सकता है। संकट से जूझ रही वोडाफोन के अगले कुछ दिनों में बकाया एजीआर का कुछ हिस्सा चुकाने की संभावना है। कंपनी ने न्यायिक राहत के अभाव में अपना कारोबार खतरे में होने को लेकर चेतावनी भी दी है।
क्या कहना है एयरटेल और वोडाफोन का
एयरटेल की गणना के मुताबिक इसका बकाया एजीआर 15000-18000 करोड़ रुपये बैठता है, जबकि दूरसंचार विभाग ने कंपनी से 35,500 करोड़ रुपये का एजीआर मांगा है। वहीं वोडाफोन की शुरुआती गणना में 18000-23000 करोड़ रुपये के बकाया की बात कही गयी है, जबकि वोडाफोन से 53000 करोड़ रुपये का बकाया एजीआर चुकाने को कहा गया है। एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। इसकी परिभाषा को लेकर विवाद के चलते ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है।
एयरटेल ने चुकाये 10000 करोड़ रुपये
इस बीच एयरटेल ने एक बयान में कहा कहा है कि भारती एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ रुपये के एजीआर का भुगतान कर दिया है। दूरसंचार विभाग के अनुसार भारती एयरटेल पर कुल बकाया एजीआर राशि 35,586 करोड़ रुपये की है। कंपनी ने कहा कि वह बाकी भुगतान 17 मार्च से पहले कर देगी। कंपनी को थोड़ा सम चाहिए क्योंकि उसे 22 सर्किलों में बकाया की गणना की पूरी करनी है। कंपनी के अनुसार भारती एयरटेल, भारती हेक्साकोम और टेलीनॉर की ओर से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
दूरसंचार विभाग भेज सकता है नोटिस
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अगर टेलीकॉम कंपनियों की गणना उनके खुद के अनुमान से मेल नहीं खाती तो दूरसंचार विभाग उन्हें नये नोटिस भेज सकता है या समय पर बकाया न चुकाने पर कार्रवाई भी कर सकता है। दूरसंचार विभाग ने तुरंत भुगतान करने के लिए 14 फरवरी को दूरसंचार ऑपरेटरों को पांचवां और अंतिम नोटिस जारी किया था। वोडाफोन आइडिया का कुल एजीआर बकाया, 53,000 करोड़ है, जिसमें 24,729 करोड़ रु स्पेक्ट्रम बकाया और 28,309 करोड़ रु लाइसेंस शुल्क के शामिल हैं।
यह भी पढ़ें - एजीआर की टेंशन के बीच Airtel को हुआ 1035 करोड़ रुपये का घाटा
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