नयी दिल्ली। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एयरटेल को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 1035 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। एजीआर को लेकर चल रही टेंशन के बीच एयरटेल को 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 1035 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। एयरटेल को हुए इस भारी घाटे के पीछे असल वजह लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम यूसेज से संबंधित असाधारण शुल्क है। बता दें कि 2018-19 की समान तिमाही में एयरटेल 86.2 करोड़ रुपये के मुनाफे में रही थी। हालांकि एजीआर के लिए प्रोविजन की वजह से इसे पिछली यानी 2019-20 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 23,044.9 करोड़ रुपये का भारी भरकम घाटा हुआ था। बता दें कि एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम ऑपरेटरों से लेता है। एयरटेल को करीब 35,500 करोड़ रुपये का एजीआर चुकाना है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है। एयरटेल और वोडाफोन की रिव्यू पिटीशन तक खारिज की जा चुकी हैं। इन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन खारिज के होने के बाद शीर्ष अदालत में संशोधित याचिका दाखिल कर दी, जिस पर सुनवाई होनी है।

आमदनी में हुआ इजाफा
एयरटेल को बेशक बहुत भारी घाटा हुआ है, मगर इसकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। तिमाही दर तिमाही आधार पर एयरटेल की आमदनी 3.86 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 21,947.1 करोड़ रुपये रही। साल दर साल आधार पर भी इसकी आमदनी में 8.5 फीसदी का इजाफा देखने को मिला। सबसे खास और जरूरी चीज है कि एयरटेल के एआरपीयू यानी प्रति उपभोक्ता औसत आमदनी में बढ़ोतरी हुई। दिसंबर में प्लान महंगे करने का फायदा कंपनी को मिला है। जुलाई-सितंबर के मुकाबले एयरटेल का एआरपीयू 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 135 रुपये पर पहुँच गया।
मोबाइल 4जी डेटा ग्राहकों की संख्या बढ़ी
2018-19 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के मुकाबले 2019-20 की समान तिमाही में एयरटेल के मोबाइल 4जी डेटा ग्राहकों की संख्या 7.71 करोड़ से 60.6 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 12.38 करोड़ हो गयी। 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 2.1 करोड़ ग्राहक एयरटेल के 4जी नेटवर्क से जुड़े। वहीं कंपनी के डिजिटल टीवी कारोबार में 15.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
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