नयी दिल्ली। एजीआर का बकाया चुकाने के मामले में एयरटेल और वोडाफोन की दिक्कत कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। बीते रविवार को वित्त मंत्रालय ने टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर बकाया पर ब्याज और जुर्माने में राहत देने पर आपत्ति जतायी। बता दें कि रविवार को इस मामले में दूरसंचार विभाग के मुख्यालय में टेलीकॉम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि जुर्माना के भुगतान पर किसी भी तरह की रियायत से एक गलत संदेश जायेगा और भविष्य में इसी तरह की दूसरी मांग भी उठ सकती है। इस सिलसिले में बहु-मंत्रालय डिजिटल संचार आयोग की एक फुल बैठक आज यानी सोमवार को होने की संभावना है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर चुकाने के लिए 17 मार्च की अंतिम डेडलाइन रखी है। अपने 53000 करोड़ रुपये के बकाया में से वोडाफोन 3500 करोड़ रुपये और एयरटेल 35,586 करोड़ रुपये में से 10000 करोड़ रुपये अदा कर चुकी है।
कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया
एयरटेल और वोडाफोन सहित टाटा टेलीकम्यनिकेशंस के अलावा कुछ और कंपनियों सहित पूरे टेलीकॉम सेक्टर पर 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें पिछले लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के साथ-साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। 22,589 करोड़ रुपये के मूल के साथ इसमें 92,641 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क है। टेलीकॉम कंपनियों पर 55,054 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज बकाया है। हालांकि सरकार भी 17 मार्च तक इस मामले के निपटारे के लिए तेजी से काम कर रही है।
सभी कंपनियों को बचाने के लिए जद्दोजहद
रविवार को हुई बैठक में सभी अधिकारी इस बात पर सहमत दिखे कि सभी मौजूदा कंपनियों को बचाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाना चाहिए। इससे सबसे अधिक राहत वोडाफोन आइडिया को मिलेगी, जिसकी हालत तीनों बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों में सबसे अधिक खराब है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एक टॉप अधिकारी ने कहा कि इस सेक्टर में किसी एक या दो कंपनियों की स्वामित्व नहीं होना चाहिए। सरकार की तरफ से इस तरह के बयान पहले भी आये हैं।
लोन देने का भी प्रस्ताव
कल हुई बैठक में टेलीकॉम सचिव अंशु प्रकाश ने एक प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इसमें एक प्रस्ताव टेलीकॉम कंपनियों को सॉफ्ट लोन देने का भी था ताकि इन कंपनियों के सामने एक दम नकदी का संकट न आ जाये और वे आसानी से बकाया चुका सकें। सॉफ्ट लोन में नियम और शर्तें उधार लेने वालों के लिए सुविधाजनक बनायी जाती हैं। मगर इस प्रस्ताव पर अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन पायी। हालांकि इसी तरह के एक दूसरे प्रस्ताव पर कुछ हद सहमति बनी जिसमें पीएसयू बैंकों या दूसरे संस्थानों से इन कंपनियों को कर्ज दिया जा सकता है।
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