नयी दिल्ली। नये पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब और नयी टैक्स दरों को सही बताते हुए राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा है कि यह एक "अनुचित प्रत्यक्ष कर व्यवस्था" को दूर करने वाला कदम है। उन्होंने अपने विभाग द्वारा किये गये एक विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि आईटी (इनकम टैक्स) रिटर्न भरने वालों में से लगभग 92 फीसदी ने 2 लाख रुपये से कम की छूट का लाभ उठाया। नये सिस्टम से ये लोग अधिक फायदा ले सकते हैं। 2018-19 में संख्या में देखें तो 5.78 करोड़ करदाताओं में से लगभग 5.3 करोड़ (91.7 प्रतिशत) ने 2 लाख रुपये से कम की कटौती का दावा किया। इन छूटों में धारा 80 सी, धारा 80 डी, धारा 80 सीसीडी (1 बी) (एनपीएस की अतिरिक्त कटौती), आवास ऋण ब्याज में कटौती और मानक कटौती शामिल है। विभाग के विश्लेषण के अनुसार सभी करदाताओं के 1 प्रतिशत से कम यानी करीब 3.77 लाख करदाताओं ने 4 लाख रुपये से अधिक की कटौती का दावा किया।

क्या कहा वित्त मंत्री ने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपने बजट के बाद की मीडिया बातचीत में कहा था कि नए सिस्टम से निश्चित रूप से बहुत करदाताओं पर टैक्स का बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा समय के साथ-साथ छूट और कटौती को खत्म करके टैक्स को कम करना है। उनके अनुसार नया सिस्टम में मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग के लिए दरों में "बड़ी कटौती" की पेशकश की गयी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि नयी टैक्स प्रणाली मौजूदा सिस्टम के साथ चलती रहेगी और यह वैकल्पिक होगी। मौजूदा कर प्रणाली में चार टैक्स स्लैब हैं, नए सिस्टम में सात टैक्स स्लैब हैं और दरें भी हैं। मगर इसका फायदा उठाने के लिए टैक्स देने वालों को कई तरह की छूट से हाथ धोना पड़ेगा।
नया टैक्स सिस्टम चुनने पर पुराने में नहीं जा सकेंगे
ध्यान रखें कि एक बार अगर कोई व्यक्ति नई कर प्रणाली चुनता है, तो कटौती और छूट प्रदान करने वाले मौजूदा सिस्टम में उसकी वापसी नहीं होगी। यानी फिर उसे नये सिस्टम के तहत ही टैक्स देना होगा। यह गणना करते हुए कि क्या आपके के लिए मौजूदा छूटों को छोड़ कर नया सिस्टम चुनना बेहतर होगा, आपको उन छूटों पर भी देना होगा, जिन्हें जारी रखा गया है।
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