नयी दिल्ली। मौजूदा समय में हर किसी के लिए अपनी जॉब या कारोबार से अलग आर्थिक सुरक्षा के लिए निवेश के कई रास्ते हैं। एफडी, शेयर बाजार, बॉन्ड्स या पोस्ट ऑफिस की किसी बचत खाता योजना वगैरह इनमें शामिल हैं। ऐसा ही एक रास्ता है म्यूचुअल फंड। म्यूचुअल फंड में दो आम तौर पर दो तरह की योजनाएँ होती हैं इक्विटी और डेब्ट। आज हम आपको बताने जा रहे हैं म्यूचुअल फंड की डेब्ट योजना के बारे में। हम आपको बतायेंगे इसके 5 लाभ क्या हैं। उससे पहले हम आपको बताते हैं कि म्यूचुअल फंड एक ऐसा साधन है जिसमें आपके पैसे को इक्विटी या डेब्ट मार्केट में निवेश किया जाता है। म्यूचुअल फंड कंपनियाँ आप जैसे बहुत सारे निवेशकों से पैसे जमा करके अपनी पेश की योजना के मुताबिक शेयर या डेब्ट इंस्ट्रुमेंट्स में लगाती हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियाँ ऐसे ही किसी कंपनी के शेयर या बॉन्ड्स में निवेश नहीं करती, बल्कि वे मार्केट रिसर्च और अपने एक्सपर्ट्स की जानकारी और ज्ञान के आधार पर आपका पैसा निवेश करती है। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड निवेशको की संख्या और इनमें आने वाली निवेश राशि तेजी से बढ़ी है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) या वे पूँजी जो निवेशकों ने निवेश के लिए लगायी है साल 2000 में 97,028 करोड़ रुपये के मुकाबले मौजूदा समय में 26.13 लाख करोड़ रुपये हो गयी है।
निवेश लक्ष्य पूरा करने में मदद
डेब्ट फंड में पहले से तय एक निश्चित मैच्योरिटी अवधि होती है, जिसमें आपको एक स्थिर रिटर्न मिलता है। अगर आपका निवेश उद्देश्य छोटी अवधि या निश्चित समय का है तो आप उसी हिसाब से डेब्ट फंड योजना चुन कर निवेश कर सकते हैं। इससे आपको बिना जोखिम के अपना लक्ष्य तय समय में पूरा करने में मदद मिलेगी। मगर ध्यान रहे कि म्यूचुअल फंड योजनाओं की बिक्री पर आपको कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। अगर 3 साल रखने के बाद डेब्ट म्यूचुअल फंड बेचा जाये तो लेनदेन से होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जायेगा। इंडेक्सेशन के लाभ के साथ इस पर टैक्स रेट 20.8 प्रतिशत होगी। वहीं अगर आप 3 साल से कम समय में डेब्ट म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो इस तरह के लेनदेन से होने वाले लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जायेगा। इस पर निवेशक की आयकर स्लैब के मुताबिक टैक्स लगेगा।
पैसा निकालना है आसान
म्यूचुअल फंड की डेब्ट योजनाएँ काफी लिक्विड होती हैं। लिक्विड का मतलब है कि आप फंड में अपना पैसा कभी भी निकाल सकते हैं और पैसा आपके बैंक खाते में होगा। वहीं इनमें समय से पहले पूँजी निकालने पर अधिकतर फंड कोई चार्ज नहीं लगाते। साथ ही इक्विटी म्यूचुअल फंड के उलट डेब्ट फंड शेयर बाजार की स्थिति से प्रभावित नहीं होता। बल्कि इनमें एक तय मैच्योरिटी अवधि और निश्चित ब्याज मिलती है। साथ ही डेब्ट फंडों पर लगने वाला शुल्क इक्विटी फंड से की तुलना में कम होता है क्योंकि इसकी मैनेजमेंट कोस्ट कम होती है।
निवेश पर जोखिम है कम
डेब्ट फंड्स को क्रेडिट फंड या फिक्स्ड इनकम फंड के नाम से भी जाना जाता है। डेब्ट फंड फिक्स्ड इनकम एसेट कैटेगरी में आते हैं। पहले से रिटर्न तय होने से इनमें आपका पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न की कोई चिंता नहीं रहती। निवेशक इन फंड्स में पूंजी जमा करने या कम जोखिम वाली आय के लिए ही निवेश करते हैं। साथ ही इक्विटी के मुकाबले कम जोखिम के चलते डेब्ट योजनाएँ आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता देती हैं। नये निवेशक जोखिम से बहुत बचते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए डेब्ट ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड निवेश का शानदार माध्यम है।
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