नई दिल्ली। अगर बिल्डर फ्लैट का कब्जा देने में देरी करे तो खरीदार को ब्याज के साथ पूरा पैसा वापस लेने का अधिकार है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है। इस फैसले के अनुसार बिल्डर घर खरीदार को यह कहकर पैसे देने से मना नहीं कर सकता कि फ्लैट तैयार है। आयोग का यह फैसला अब देशभर में लागू माना जाएगा।
ब्याज के साथ मिलेगा पैसा वापस
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले के अनुसार बिल्डर को ऐसे मामले में हर साल 10.65 फीसदी के हिसाब से ब्याज भी देना होगा। इस आदेश में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि बिल्डर को पैसा वापस करना होगा। अब बिल्डर का यह बहाना नहीं चलेगा कि वह निश्चत समय में कब्जे का सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाया और इस कारण से एग्रीमेंट के तय समय पर खरीदार को फ्लैट का कब्जा दिलाने में नाकाम रहा।
आयोग ने कहा कि खरीदार को फ्लैट का कब्जा लेने के लिए मजबूर नहीं किया सकता। इस मामले में एग्रीमेंट खत्म होने के 2 साल से भी ज्यादा समय बाद फ्लैट ऑफर किया गया था। आयोग ने बिल्डर को प्रति वर्ष 10.65 फीसदी की दर से ब्याज के साथ घर खदीदार को पूरा पैसा वापस करने का आदेश दिया है।

ये था मामला
दिल्ली के बिल्डर पॉइनर अर्बन लैंड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर का है। बिल्डर से एक खरीदार ने वर्ष 2012 में गुड़गांव में फ्लैट बुक कराया था। इस फ्लैट को साल 2015 में सौंपा जाने का वादा बिल्डरने किया था। लेकिन बिल्डर ऐसा करने में नाकाम रहा। ऐसे में खरीदार ने पैसा वापस पाने के लिए वर्ष 2018 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में आयोग ने बिल्डर से खरीदार को 4.43 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया।
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