नई दिल्ली। अनिल अंबानी की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। इस बार भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 5500 करोड़ रुपये के ऐसे लेनदेन पकड़े हैं, जो संदेह के घेरे में हैं। यह गड़बड़बियां रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप की दो अन्य कंपनियों के बही-खातों में पकड़ी गई हैं।

ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार आरकॉम, रिलायंस टेलिकॉम लिमिटेड और रिलायंस टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में फंड के लेनदेन की जांच में संदिग्ध लेने देने का पता चला है। जानकारी के अनसार ये रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस, लोन की कथित एवरग्रीनिंग और ऐसी छोटी इकाइयों के साथ प्रेफरेंशल डीलिंग्स का पता चला। जानकारी हुई है कि इस कंपनियों में रिलायंस ग्रुप के कर्मचारी ही निदेशक के पदों पर थे।
तीन बड़ी एंट्रीज पर सवाल
जानकारी के अनुसार मई 2017 से मार्च 2018 के बीच के हुए ट्रांजैक्शंस में यह गड़बड़ी पाई गई हैं। इन ट्रांजैक्शंस में हजारों इंट्री के बीच 3 बड़ी इंट्री पाई गईं हैं, जिनके बारे में एसबीआई की अगुवाई वाले लेंडर ग्रुप को संदेह है। इनका कहना है कि इनका संबंध फंड डायवर्जन से हो सकता है। कर्ज देने वाले अब इन डीलिंग्स की प्रामाणिकता तय करने के लिए जांच पर विचार कर रहे हैं।
अब करनी होगी गहराई से जांच
इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार रिपोर्ट क्रेडिटर्स की कमिटी को दी गई है। इस रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर प्रबंधन से सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच में कई ऐसे ट्रांजैक्शंस का पता चला, जिनकी कोई वजह नहीं दिख रही थी। गहराई से विश्लेषण करने पर पता चला कि ये कंपनी की ओर से की गईं एडजेस्टमेंट इंट्री थीं। अब पैसे की आवाजाही का पता लगाने के लिए गहराई से जांच करनी होगी।
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